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World: पाकिस्तान के पारंपरिक हथियार नियंत्रण प्रस्ताव पर अलग-थलग पड़े भारत-इसराइल; दुनिया के 180 देशों ने किया समर्थन

by Tarun Bhardwaj • November 4, 2026
India and Israel stand isolated on Pakistan’s conventional arms control proposal

World: पाकिस्तान के पारंपरिक हथियार नियंत्रण प्रस्ताव पर अलग-थलग पड़े भारत-इसराइल; दुनिया के 180 देशों ने किया समर्थन

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यूनिक समय, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की फ़र्स्ट कमिटी में ‘कन्वेंशनल आर्म्स कंट्रोल एट द रीजनल एंड सबरीजनल लेवल्स’ (क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियार नियंत्रण) से जुड़ा मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव को मुख्य रूप से पाकिस्तान और बेलारूस द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे अमेरिका, चीन और पारंपरिक मित्र रूस सहित कुल 180 देशों का भारी समर्थन प्राप्त हुआ। 193 सदस्यीय इस निकाय में केवल भारत और इसराइल ऐसे दो देश रहे, जिन्होंने इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया।

भारत ने क्यों किया विरोध?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है और इसे केवल क्षेत्रीय या उप-क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि निरस्त्रीकरण आयोग को इस विषय पर दोबारा नए दिशा-निर्देश और सिद्धांत तैयार करने का ज़िम्मा क्यों सौंपा जा रहा है, जबकि इसी आयोग में 1993, 1999 और 2017 में इस संबंध में सर्वसम्मति से तीन महत्वपूर्ण रिपोर्टें और दिशानिर्देश पहले ही तैयार किए जा चुके हैं।

भारत का मानना है कि रणनीतिक हित और सुरक्षा चिंताएं क्षेत्रीय सीमाओं से कहीं आगे तक फैली होती हैं, इसलिए क्षेत्रीय सैन्य संतुलन की अवधारणा अवास्तविक है।

रूस के रुख पर स्थिति स्पष्ट

इस प्रस्ताव को रूस द्वारा समर्थन दिए जाने पर विश्लेषकों का मानना है कि इसे भारत के खिलाफ या रक्षा सौदों पर पाबंदी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह रूस के हथियार नियंत्रण से जुड़े पारंपरिक और व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। इस प्रस्ताव में क्षेत्रीय स्तर पर हथियारों की कोई बाध्यकारी सीमा या भारत की रक्षा खरीद पर प्रतिबंध लगाने जैसी कोई बात नहीं कही गई है, बल्कि इसका उद्देश्य बातचीत के जरिए क्षेत्रीय समझौतों को बढ़ावा देना है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

प्रस्ताव पारित होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र में उसके स्थायी प्रतिनिधि ताहिर अंद्राबी ने इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। प्रस्ताव में यह तर्क दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय शांति के कई खतरे पड़ोसी देशों के तनाव से पैदा होते हैं, इसलिए पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के जरिए होना चाहिए।

साथ ही, अधिक सैन्य क्षमताओं वाले देशों को ऐसे समझौतों को बढ़ावा देने में विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के कड़े विरोध के बावजूद भारी बहुमत से पारित यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा घटनाक्रम साबित हुआ है।

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