
यूनिक समय, नई दिल्ली। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता (Trade Deal) फाइनल होने की दिशा में बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक भू-राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है।
ट्रंप का बड़ा एलान
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को तत्काल 25% से घटाकर 18% करेगा। भारत ने अमेरिका से लगभग $500 अरब के सामान खरीदने पर सहमति जताई है। ट्रंप के अनुसार, भारत अपने घरेलू ऊर्जा लक्ष्यों और द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करेगा।
क्रेमलिन की प्रतिक्रिया
ट्रंप के दावों के बाद रूस (क्रेमलिन) की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी “सर्वोपरि” है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि रूसी तेल की खरीद रोकने के संबंध में उन्हें अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
आंकड़ों का गणित
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस, भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दिसंबर 2025 में आयात पहले ही 22% घटकर 1.38 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया था। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को रोककर उसे यूक्रेन युद्ध में कमजोर करना है।
पीएम मोदी का विजन
इस ट्रेड डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इससे न केवल दोनों देशों के लोगों को लाभ होता है, बल्कि पारस्परिक सहयोग के नए द्वार भी खुलते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
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