
यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान में जारी नागरिक विद्रोह अब एक रक्तरंजित युद्ध में तब्दील हो चुका है। महंगाई और बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब शासन के अंत की मांग में बदल गया है, जिसे कुचलने के लिए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाने का आदेश दे दिया है। ‘टाइम’ पत्रिका की रिपोर्ट और स्थानीय डॉक्टरों के दावों के मुताबिक, राजधानी तेहरान के महज छह अस्पतालों में ही अब तक 217 प्रदर्शनकारियों के शव पहुंच चुके हैं। पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं पूरी तरह ठप हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि मौतों का असली आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।
मशीन गन से अंधाधुंध फायरिंग
राजधानी तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तरी तेहरान में एक पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर रही भीड़ पर सुरक्षा बलों ने मशीन गन से अंधाधुंध फायरिंग की। इस गोलीबारी में दर्जनों युवाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वाशिंगटन स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने अब तक 63 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है जिनकी पहचान हो चुकी है, लेकिन जमीनी हालात बेहद भयावह बताए जा रहे हैं।
रिवोल्यूशनरी गार्ड की धमकी
ईरानी सरकार ने अब प्रदर्शनकारियों को सीधे मौत की सजा देने का ऐलान कर दिया है। सरकारी टेलीविजन पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक अधिकारी ने माता-पिता को रूह कंपा देने वाली चेतावनी देते हुए कहा, “अपने बच्चों को सड़कों से दूर रखें, क्योंकि अगर उन्हें गोली लग जाती है, तो बाद में कोई शिकायत मत करना।” खामेनेई ने दो टूक कहा है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने वाले ‘उपद्रवियों’ के सामने नहीं झुकेंगे।
अमेरिका ने दी सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी
ईरान में बढ़ते नरसंहार ने व्हाइट हाउस को सक्रिय कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चुनौती देते हुए कहा, “अगर ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारना जारी रखा, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। हम उन्हें बचाने के लिए तैयार हैं और ईरान को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” ट्रंप की इस धमकी ने पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
क्यों जल रहा है ईरान?
ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैली इस आग की मुख्य वजह बेतहाशा महंगाई, गिरती मुद्रा (रियाल) और चरमराती अर्थव्यवस्था है। जनता का आरोप है कि सरकार जनहित के बजाय क्षेत्रीय संघर्षों और दमनकारी नीतियों पर पैसा खर्च कर रही है। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण ईरान अब दुनिया से पूरी तरह कट चुका है, जिससे वहां हो रही मानवाधिकारों की धज्जियां दुनिया के सामने नहीं आ पा रही हैं।
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