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खेल निराला : तहसील में एक व्यक्ति के तीन आय प्रमाणपत्र हुए जारी

by Raju Chaurasia • September 20, 2022
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  • हर आय प्रमाण पत्र में अलग-अलग है वार्षिक आय
  • गरीब की वास्तविक आय दर्शाने में लगा दिए महीनों

वरिष्ठ संवाददाता
यूनिक समय, मथुरा। गोवर्धन तहसील के लेखपाल अपने को सर्वे सर्वा समझते हैं। सुविधा शुल्क मिल जाए तो बिना  देखे परखे ही उनसे मनमानी रिपोर्ट लगवा लो। इनकी शिकायत हो जाए तो इनके विरूद्ध कार्रवाई भी नहीं होती है। ऐसा ही मामला गांव अडींग के  एक ही व्यक्ति के साथ देखने को मिला। जिसके तीन-तीन आय प्रमाण पत्र तहसील से जारी हो गए। मजे की बात यह रही कि तीनों में उसकी आय अलग- अलग एक ही लेखपाल ने दर्शा दी। एक ही जमीन पर दो किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए नकलें बना देते हैं। इन हालातों के चलते महीनों से अधिवक्ताओं ने गोवर्धन तहसील में कार्य बहिष्कार भी किया हुआ है।

तहसील के गांव अडींग निवासी विजय पुत्र प्रताप का 28 जून को 14522 1007241 रजिस्ट्रेशन से रुपये 60000 वार्षिक आय प्रमाण पत्र बना दिया। इसके बाद उन्होंने आवेदन किया तो 4 अगस्त 2022 को उनकी आय 80000 रुपये दर्शा दी। इसके बाद 3 सितंबर 2022 को रजिस्ट्रेशन नंबर 14522 1009 503 के माध्यम से जारी हुए उनके आय प्रमाण पत्र में आय 46000 रुपये वार्षिक कर दी गई। गरीब आवेदक के वास्तविक आय का प्रमाण पत्र सबसे आखिर में बनाया गया। तहसील में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि छोटे-छोटे कामों की मोटी रिश्वत मांगी जाती है।

यहां किसान क्रेडिट कार्ड के लिए बनने वाले खसरा खतौनी में भी बैंक का लोन दिखाने और ना दिखाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। अड़ींग के ऐसे कई मामले चर्चा में है जिनमें एक ही जमीन पर कई कई बैंकों से लोन हो रखे हैं। इस खेल में तहसील का स्टाफ पूरी तरह से शामिल है। ऐसे ही काफी मामले बछगांव के बताए जाते हैं। तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते हैं अधिवक्ताओं ने भी महीनों से कार्य बहिष्कार किया हुआ है। कई खतौनियां ऐसी है, जिनमें अभी भी दो- दो केसीसी चढ़े हैं। इस खेल में लोन कराने वाला एवं लोन के नाम पर मोटी रकम एंठने वाला ग्रुप सालों से सक्रिय बताया गया है।

हर गांव में हैं लेखपालों के दलाल
मथुरा। गोवर्धन तहसील के हर गांव में लेखपालों के दलाल हैं। उनके माध्यम से से सुविधा शुल्क मिल जाए तो जितने का चाहो आय प्रमाणपत्र बनवा लो। यही हाल ई डब्लूएस प्रमाणपत्रों का है। जब शासन ने आठ लाख रुपये की आय वालों को ईडब्लूएस में शामिल करने के आदेश दिए हैं तो तहसील के लेखपाल पात्रों के ईडब्लूएस प्रमाणपत्र बनाने में आना कानी करते हैं जबकि जिनसे सुविधा शुल्क मिल जाए उनके आसानी से प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाते हैं। इसकी जांच की जाए तो बड़ा खेल उजागर होगा।

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