
यूनिक समय, नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में आज गुरुवार को भी मकर संक्रांति का पर्व पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के इस पावन अवसर पर गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के तटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। विशेष रूप से प्रयागराज के माघ मेले में आज मुख्य स्नान पर्व है, जहाँ शाम तक 91 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं। प्रशासन का अनुमान है कि देर रात तक यह संख्या डेढ़ करोड़ के जादुई आंकड़े को छू सकती है।
सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, देश के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी उत्सव का माहौल है। काशी के गंगा घाटों और पश्चिम बंगाल के गंगासागर में लाखों लोगों ने स्नान कर दान-पुण्य किया। पंजाब के अमृतसर में स्थित सचखंड श्री दरबार साहिब में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर अरदास की।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का तिल के तेल से विशेष अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान भगवान को तिल अर्पित किए गए और तिल के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अपने दिल्ली स्थित आवास पर गायों को चारा खिलाकर सेवा और करुणा का संदेश दिया।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी माना जाता है। आज के दिन खिचड़ी का दान, तिल का सेवन और पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि ठिठुरती ठंड के बावजूद संगम की रेती से लेकर गंगा के तटों तक आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।
जहाँ एक ओर त्योहार की खुशियाँ मनाई जा रही हैं, वहीं पतंगबाजी के शौक ने कई परिवारों में मातम फैला दिया है। पिछले दो दिनों में पतंग के मांझे और संबंधित हादसों के कारण देशभर में 17 लोगों की मौत की खबर है। सबसे ज्यादा असर गुजरात में देखने को मिला जहाँ 9 लोगों की जान गई।
राजस्थान में 6, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में 1-1 व्यक्ति की मौत की दुखद घटना सामने आई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित तरीके से पतंगबाजी करें और प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का उपयोग बिल्कुल न करें।
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