
यूनिक समय, नई दिल्ली। दीपावली के शुभ अवसर पर मथुरा जिला कारागार में एक विशेष पहल की गई, जिसके तहत खजनी वेलफेयर संस्था ने जेल में बंद बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। संस्था के प्रशिक्षकों ने कुल 1460 बंदियों में से 25 बंदियों को सुंदर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ, रंग-बिरंगे दीपक और मोमबत्तियाँ बनाने का प्रशिक्षण दिया, जिससे पूरे कारागार में उत्सव जैसा सकारात्मक वातावरण बन गया।
सकारात्मक सोच और पुनर्वास का प्रयास:
अंशुमान गर्ग ने बताया कि ऐसी पहल से बंदियों में सकारात्मक सोच का विकास होता है, जो उन्हें समाज में लौटने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। जिला कारागार में संस्था समय-समय पर कुख्यात अपराधियों को भी सुधार के मार्ग पर लाने के लिए काउंसलिंग और मार्गदर्शन प्रदान करती है। प्रशिक्षण के माध्यम से दीपावली से जुड़ी वस्तुएं बनाने का अवसर देने से बंदियों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई है।
जेल परिसर में भक्ति और प्रकाश का वातावरण:
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों को समाज में सम्मानपूर्वक स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दीपावली के अवसर पर जब इन बंदियों द्वारा बनाए गए दीपक और मूर्तियाँ जेल परिसर में सजाई गईं, तो पूरा वातावरण भक्ति और प्रकाश से जगमगा उठा। जेल प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आगंतुक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ अपराधियों के जीवन में नई रोशनी भरती हैं और उन्हें आत्म-सुधार की प्रेरणा देती हैं।
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