ऐसा है मुजफ्फरनगर का सियासी गणित: मोदी की चाहत, चौधरी की जरूरत

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 28 प्रत्याशी के नामों की घोषणा बीजेपी ने कर दी है. बीजेपी एक बार फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश में सियासी जंग जीतने के लिए पुराने और प्रतिष्ठित चेहरों को उतारा है. जाति का कार्ड खेलते हुए बीजेपी ने जाट के सामने जाट, राजपूत के सामने राजपूत और वैश्य के सामने वैश्य समुदाय के लोगों को खड़ा किया है. यूपी का जाट लैंड माने जाने वाले मुजफ्फरनगर में मुकाबला इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बनाम राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) हो गया है. आइए जानते हैं क्या है मुजफ्फरनगर का सियासी समीकरण:-
मुजफ्फरनगर के दक्षिण-पश्चिम में करीब 20 किलोमीटर दूर कुटबी-कुटबा नाम के दो गांव हैं. बहुसंख्यक जाट वाले इन गांवों में कुटबी और कुटबा अविभाज्य हैं. ये बताना मुश्किल है कि पहले गांव कि सीमा कहां खत्म होती है और दूसरे गांव की सीमा कहां से शुरू होती है.
कुटबा गांव के निवासी और जाट एक्टिविस्ट विपिन सिंह बाल्यान बताते हैं, ‘कुटबा-कुटबी एक ही गांव हैं, इनके बीच कोई सीमा नहीं है. आप एक गांव को दूसरे से अलग करके नहीं देख सकते.’ गांववाले ये भी मानते हैं कि जाट बहुल कुटबा-कुटबी वाले गांव से एक ही जाट राष्ट्रीय राजनीति में हैं. इसके अलावा बीजेपी में मुजफ्फरनगर से कोई जाट नहीं है. कुटबा गांव के रहने वाले सतीश बाल्यान के मुताबिक, ‘बीजेपी में मुजफ्फनगर से कोई जाट नहीं है. चौधरी साहिब (चौधरी अजित सिंह) ही इकलौते जाट हैं. राजनीति में उनके अलावा और कोई जाट है ही नहीं. अगर अजित सिंह चुनाव हार जाते हैं, तो राजनीति से जाटों का सफाया हो जाएगा.’
चौधरी अजित सिंह की तारीफ करते हुए गन्ना किसान सतीश बाल्यान आगे कहते हैं, ‘देश में दो ही जाट हैं. बॉलीवुड में धर्मेंद्र और राजनीति में चौधरी अजित सिंह.’
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को राजनीति विरासत में मिली है. उन्होंने जाटों के मसीहा के रूप में अपनी पहचान बनाई है. उनके पिता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह इस बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे और आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बागपत से चुनाव मैदान में हैं. यह पहली बार है जब अजित सिंह बागपत के अलावा किसी दूसरी सीट से मैदान में उतरे हैं.
कुटबी गांव के रवि बाल्यान कहते हैं, ‘मोदी ने मुजफ्फरनगर को लेकर वादें तो कई सारे किए, लेकिन एक भी वादा नहीं निभाया. खातें में 15 लाख रुपये से लेकर पेट्रोल के दाम घटाने तक और आर्टिकल 370 हटाने से लेकर गांवों के बिजलीकरण तक चुनाव के दौरान किया गया एक भी वादा धरातल पर नहीं दिखा. एयर स्ट्राइक तो इसके पहले भी हुए थे, लेकिन तब की सरकार ने इसका शो ऑफ नहीं किया. जैसे की एनडीए सरकार कर रही है.’
हालांकि, रवि बाल्यान के दोस्त मोहित की राय कुछ अलग है. वो कहते हैं, ‘मैं तो बीजेपी के लिए वोट करूंगा. यहां तक कि मेरा पूरा गांव बीजेपी के लिए वोट करेंगे. पार्टी ने हमारे यहां काम किया है. हमारे सांसद संजीव बाल्यान दंगे के दिनों में हमारे साथ खड़े थे. हर संभव मदद की. हमारे क्षेत्र में अपराध खत्म हो चुका है.’ एक दूसरे सपोर्टर कहते हैं, ‘बीजेपी ने जाट समेत सभी हिंदुओं को अपनी पार्टी में जगह दी है. पुलवामा हमले में हमारे शहीदों का बदला भी सरकार ने लिया. इसलिए हम बीजेपी के साथ हैं और चुनाव में उनको सपोर्ट करेंगे.’

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