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टेरर फंडिंग के दोषी मलिक के लिए एनआईए ने मांगी फांसी, फैसले से पहले श्रीनगर के कई हिस्से बंद, सुरक्षा कड़ी

by Prahlad • May 25, 2022
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टेरर फंडिंग केस में एनआईए की कोर्ट में दोषी करार हो चुके अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा का ऐलान होने वाला है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में बुधवार को मामले में इस बात पर बहस हुई कि मलिक को कितनी सजा मिलेगी।
इस मामले में एनआईए ने यासीन के लिए फांसी की सजा की मांग की है। कोर्ट अपना फैसला दोपहर 3ः30 बजे के बाद सुनाएगी। 19 मई की सुनवाई के दौरान यासीन अपने गुनाह कबूल कर चुका है। फैसले से पहले श्रीनगर के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया गया है।
अदालत में यासीन की दलील
बुधवार को फैसला आने से पहले कोर्ट पहुंचे यासीन ने कहा कि अगर मैं 28 साल के दौरान किसी आतंकवादी गतिविधि या हिंसा में शामिल रहा हूं और खुफिया एजेंसियां यह साबित करती हैं, तो मैं भी राजनीति से संन्यास ले लूंगा। मुझे फांसी मंजूर होगी। मैंने सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। मैं अपने लिए कुछ भी नहीं मांगूंगा। मैं अपनी किस्मत का फैसला अदालत पर छोड़ता हूं।
एनआईए जस्टिस प्रवीण सिंह ने कहा कि एनालिसिस से पता चलता है कि गवाहों के बयान और सुबूतों से लगभग सभी आरोपियों का एक-दूसरे से संपर्क और पाकिस्तानी फंडिंग साबित हुई है।
लाल चौक में भारी फोर्स तैनात
रिपोर्ट्स के मुताबिक लाल चौक की कुछ दुकानों सहित मैसूमा और आसपास के इलाकों में ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। पुराने शहर के कुछ इलाकों के बाजार भी बंद रहे, हालांकि परिवहन सामान्य रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर में सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है।
इमरान ने यासीन की सजा को बताया फासीवादी रणनीति
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने यासीन मलिक को सजा दिए जाने का विरोध किया है। इमरान ने लिखा- मैं कश्मीरी नेता यासीन मलिक के खिलाफ मोदी सरकार की उस फासीवादी रणनीति की कड़ी निंदा करता हूं, जिसके तहत उन्हें अवैध कारावास से लेकर फर्जी आरोपों में सजा दी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को फासीवादी मोदी शासन के राजकीय आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
इन नेताओं पर भी कसा शिकंजा
10 मई को पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि मलिक ने आजादी के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दुनिया भर से फंडिंग के नाम पर पैसे लिए। कोर्ट ने फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, मोहम्मद यूसुफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख, और नवल किशोर कपूर सहित अन्य कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे।

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