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पाकिस्तान: ये ऐतिहासिक शिव मंदिर, एक तो बंटवारे के समय से से ही कर दिया गया था बंद

by Raju Chaurasia • July 19, 2022
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देशभर में लोगों ने शिवालयों में भगवान भोलेनाथ की अभिषेक किया। कांवड़ियों ने कांवड़ में जल भरकर अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों में शिव शंकर की पूजा की। बता दें कि भारत की तरह ही पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी कई प्राचीन शिव मंदिर हैं। हालांकि, पाकिस्तान में बढ़ती मजहबी कट्टरता और वहां की सरकार की उदासीनता के चलते इन मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पाता है। पाकिस्तान में एक ऐसा भी मंदिर है, जो बंटवारे के समय ही बंद पड़ा था। हालांकि, 72 साल बाद उसे खोला गया है। पाकिस्तान के 6 शिव मंदिर, जो हैं जर्जर हालत में..

पाकिस्तान के पंजाब में स्थित कटासराज मंदिर चकवाल जिले से 40 किलोमीटर दूर चोवा सैदानशाह कस्बे में स्थित है। यह हिंदुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल की तरह है। यह शिव मंदिर 900 साल पुराना माना जाता है।इस मंदिर की कथा भगवान शिव द्वारा माता सती की याद में बहाए गए आंसू तथा महाभारत काल में पांडवों को मिले वनवास से जुड़ी हुई हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, जब माता ने खुद को अग्नि को समर्पित कर दिया तब भगवान शंकर की आंखों से दो आंसू गिरे थे। एक आंसू कटास में गिरा, जिससे वहां अमृत कुण्ड सरोवर बन गया। दूसरा अजमेर में गिरा, जहां पुष्करराज तीर्थ है। कोई देखरेख न होने के कारण अब कटास मंदिर में मौजूद सरोवर सूखता जा रहा है।

उमरकोट का पुराना नाम अमरकोट था। सिंध प्रांत के उमरकोट में पुराना शिव मंदिर है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने मंदिर को बेहद नुकसान पहुंचाया था। पुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की थी। दोनों देशों के बीच हुई तनातनी के बाद इस मंदिर को बंद कर दिया गया था। उमरकोट में सैंकड़ों साल पहले चट्टान काटकर शिव मंदिर बनाया गया था। इसका गर्भगृह काफी बड़ा है जहां शिवलिंग है। मंदिर के मेन गेट दुर्गा मंदिर भी है।

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में एक 150 साल पुराना शिव मंदिर है। इस मंदिर को रत्नेश्वर महादेव भी कहते हैं। इस मंदिर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं और हर रविवार को यहां विशाल भंडारा होता है। कट्टरपंथियों द्वार इस मंदिर को बेहद नुकसान पहुंचाया गया। बता दें कि 8 साल पहले 2014 में पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं ने इस मंदिर को बचाने के लिए एक अभियान चलाया था।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मानसेहरा शहर में चित्ती गट्टी इलाके में एक शिव मंदिर है। इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग करीब 2000 साल पुराना बताया जाता है। महाशिवरात्रि के त्योहार को यहां धूमधाम से मनाया जाता है। यहां हर रोज पूजा नहीं होती लेकिन शिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में शिवलिंग के अलावा भगवान गणेश, शिव-पार्वती और काली माता की मूर्तियां हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित जोही दादू में 200 साल पुराना शिव मंदिर है। यह मंदिर भी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहा है। चारों ओर से मंदिर को काफी क्षति पहुंचाई गई है। अब यहां टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष ही बचे हैं। अब यहां कुछ कबीलों का परिवार रहता है। कुछ लोगों का मानना है कि पहले यह जैन मंदिर था लेकिन टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां बताती हैं कि यह शिव मंदिर है। यह मंदिर भारत और नेपाल के शिव मंदिरों की तरह ही दिखता है।

पाकिस्तान के सियालकोट में एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है। 2019 में पाकिस्तान में स्थित इस मंदिर को एक बार फिर खोला गया है। यह मंदिर 1947 में बंटवारे के समय से ही बंद था। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने मंदिर को विस्फोट से काफी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद से इस मंदिर के आसपास भी लोगों को नहीं जाने दिया जाता था। पाकिस्तान इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड की पहल पर 72 साल बाद इस मंदिर के कपाट खोले गए।

 

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