पीएम मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता; दोनों पक्षों ने कई बड़े समझौतो पर किए हस्ताक्षर

पीएम मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज

यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को गुजरात के गांधीनगर में एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। चांसलर मर्ज की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के लिए मील का पत्थर साबित हुई है, क्योंकि यह राजनयिक संबंधों के 75 साल और रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर हो रही है। दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को ‘लिमिटलेस’ (असीमित) बनाने का संकल्प लेते हुए भविष्य का साझा रोडमैप तैयार किया।

आतंकवाद पर कड़ा प्रहार

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति दोहराई गई। पीएम मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुए आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।

दोनों नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) को खत्म करने के लिए दुनिया को एक होना होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध आतंकी संगठनों और उनके वित्तपोषण (Funding) के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।

रक्षा और ‘लिमिटलेस’ आर्थिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत और जर्मनी का सहयोग केवल दो देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए जरूरी है। दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष (Space), और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (Critical Technology) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पीएम ने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान करते हुए इसे दोनों देशों की विकास यात्रा के लिए अनिवार्य बताया। रक्षा विनिर्माण और तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के क्षेत्र में भी ठोस प्रगति पर सहमति बनी।

इंडो-पैसिफिक में नई कूटनीतिक पहल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों नेताओं ने एक नए द्विपक्षीय इंडो-पैसिफिक परामर्श तंत्र की घोषणा की। भारत ने इस क्षेत्र में जर्मनी की बढ़ती सक्रियता का स्वागत किया। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI) के तहत क्षमता निर्माण और संसाधनों को साझा करने की दिशा में मिलकर काम करने की पुष्टि की। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के सम्मान और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आपसी कानूनी सहायता संधि का स्वागत

कानूनी सहयोग को मजबूत करने के लिए नेताओं ने आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT) के अनुसमर्थन का स्वागत किया। इससे अपराधों की जांच और आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह के कामकाज में तेजी आएगी। चांसलर मर्ज की इस यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में जर्मनी, भारत को अपने सबसे विश्वसनीय और प्रमुख एशियाई साझेदार के रूप में देखता है।

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