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ब्रज के विरक्त संत शिरोमणि रमेश बाबा हुए ब्रह्मलीन; 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, ब्रजभूमि में शोक की लहर

by Tarun Bhardwaj • October 6, 2026
Ramesh Baba, the crest-jewel of the renunciate saints of Braj, has attained Brahma-leen

ब्रज के विरक्त संत शिरोमणि रमेश बाबा हुए ब्रह्मलीन; 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, ब्रजभूमि में शोक की लहर

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यूनिक समय, बरसाना (मथुरा)। सनातन धर्म, गौ-सेवा और ब्रज संस्कृति के अनन्य उपासक, विरक्त संत शिरोमणि पूज्य रमेश बाबा महाराज 90 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए हैं। उनके देवलोकगमन की खबर फैलते ही पूरे ब्रजमंडल, बरसाना और देश-विदेश में बसे उनके लाखों श्रद्धालुओं में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। वर्ष 1953 से ही मान मंदिर (बरसाना) को अपनी साधना स्थली बनाकर उन्होंने अपना पूरा जीवन ब्रजभूमि, यमुना स्वच्छता, गौ-संरक्षण और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया था।

सात दशकों से कर रहे थे ब्रज की निस्वार्थ सेवा

मूल रूप से उच्च शिक्षित और विरक्त भाव से जीवन जीने वाले पूज्य रमेश बाबा ने 1950 के दशक (वर्ष 1953) में ही गृहस्थ जीवन और सांसारिक मोह-माया का त्याग कर ब्रजभूमि को अपनी कर्मभूमि बना लिया था। बरसाना स्थित गहवर वन और मान मंदिर पहाड़ी पर रहकर उन्होंने सात दशकों से अधिक समय तक कठोर तपस्या और साधना की। उन्होंने न केवल ब्रज के पौराणिक स्थलों के पुनरुद्धार के लिए कार्य किया, बल्कि ब्रज की लुप्त होती परंपराओं और रासलीला संस्कृति को पुनर्जीवित करने में ऐतिहासिक योगदान दिया।

गौ-सेवा और ‘माताजी गौशाला’ का ऐतिहासिक योगदान

रमेश बाबा महाराज को उनके अभूतपूर्व गौ-सेवा कार्यों के लिए सदैव याद किया जाएगा। उन्होंने बरसाना में विश्व की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक ‘माताजी गौशाला’ की स्थापना की, जहाँ हजारों असहाय, बीमार और कसाइयों के चंगुल से बचाई गई गायों की निस्वार्थ सेवा की जाती है। उनके आह्वान पर हजारों युवा और श्रद्धालु गौ-संरक्षण के अभियान से जुड़े और ब्रज में गौ-हत्या के खिलाफ एक सशक्त चेतना का संचार हुआ।

यमुना मैया की स्वच्छता और पर्वतों की रक्षा का संकल्प

ब्रज के पर्यावरण, यमुना नदी की अविरलता और ब्रज के पौराणिक पर्वतों (गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव की पहाड़ियों) को खनन माफियाओं से बचाने के लिए रमेश बाबा ने आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रज के पर्वतों को संरक्षित क्षेत्र घोषित कराया जा सका। पवित्र यमुना जी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए चलाए गए जनजागरण अभियानों में भी उनकी अग्रणी भूमिका रही।

संत समाज और श्रद्धालुओं ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

पूज्य रमेश बाबा के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही ब्रज के विभिन्न पीठों के आचार्यों, संत-महंतों, धर्माचार्यों और राजनीतिक जगत की प्रमुख हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संतों का कहना है कि रमेश बाबा का जाना केवल ब्रज के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बरसाना स्थित मान मंदिर परिसर में उनके अंतिम दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है।

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