यूनिक समय, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरी पाने के लिए आवेदकों के चरित्र सत्यापन की नीति को और अधिक कड़ा कर दिया है। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्ती की नियुक्तियों के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू की गई है। नई नीति के तहत स्पष्ट किया गया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं माना जाएगा, लेकिन हिंसक प्रदर्शनों या विध्वंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को सरकारी सेवा से दूर रखा जाएगा। हिंसक प्रदर्शन और गंभीर मामलों में प्रतिबंध सरकार के नए आदेश के मुताबिक, यदि कोई अभ्यर्थी किसी ऐसे संगठन का सदस्य है जिसका उद्देश्य हिंसात्मक रीति से समाज की व्यवस्था बदलना है, या जो किसी भी प्रकार के हिंसक आंदोलन व प्रदर्शन में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं समझा जाएगा। इसके अलावा हत्या, बलवा, देशद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, दुष्कर्म, दहेज हत्या, पॉक्सो अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन (PMLA) जैसे गंभीर मामलों में आरोप तय होने या दोषी ठहराए जाने पर नौकरी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही नकल माफिया, प्रश्नपत्र लीक करने वाले साल्वर गैंग, फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले तथा डिजिटल अरेस्ट व यूपीआई ठगी जैसे साइबर अपराधों में शामिल लोग भी अपात्र घोषित किए गए हैं। सत्यापन की प्रक्रिया और समयावधि नई व्यवस्था के तहत नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी का पूरा विवरण पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), गृह जनपद के जिलाधिकारी और उन जिलाधिकारियों को भेजेंगे जहाँ अभ्यर्थी पिछले पाँच वर्षों में एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो। जिलाधिकारी स्थानीय पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त कर अपनी संस्तुति नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेंगे, और पुलिस विभाग को 30 दिन के भीतर अपनी सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी। सामान्य मामलों में पुलिस और अभिसूचना इकाई अपने अभिलेखों के आधार पर जाँच करेगी, जिसके लिए अभ्यर्थी की अतिरिक्त भौतिक उपस्थिति या पूछताछ की आवश्यकता नहीं होगी। प्रतिकूल रिपोर्ट आने की स्थिति में जिलाधिकारी द्वारा अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाएगा। स्वघोषणा और प्रोविजनल नियुक्ति के प्रावधान अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र और स्वघोषणा पत्र में अपनी गिरफ्तारी, अभियोजन या न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने से संबंधित पूरी जानकारी देनी होगी। पूर्व सेवा से बर्खास्तगी या अनुचित साधनों के प्रयोग के कारण प्रतिबंधित किए जाने का विवरण देना भी अनिवार्य होगा; तथ्य छिपाने पर नियुक्ति रद्द की जा सकती है। हालाँकि, यदि आवेदन में आपराधिक मामले का उल्लेख न होने के बावजूद अभ्यर्थी मेडिकल परीक्षण या सत्यापन के दौरान इसकी लिखित जानकारी दे देता है, तो केवल इस आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद्द नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त, चयन के बाद चरित्र सत्यापन पूरा होने से पहले अभ्यर्थियों को प्रोविजनल नियुक्ति पत्र दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: India: प्रधानमंत्री मोदी 30 अक्टूबर को जारी करेंगे पीएम किसान सम्मान निधि 24वीं किस्त; किसान परिवारों को मिलेगा लाभ ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]