शिवसेना-भाजपा फिर हुई एक साथ: महाराष्ट्र की राजनीति में आया भूचाल, फंसे मनोहर जोशी पार्टी ने झाड़ा पल्ला

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार का गठन होने के बावजूद रोजाना नया-नया घटनाक्रम देखने को मिला रहा है। अब शिवसेना के वरिष्ठ  नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी के एक बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार से फिर से भूचाल आ गया है।  पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने एक बयान देकर कहा था कि शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी जल्द ही एक साथ आने वाले हैं। मनोहर जोशी के इस बयान से अब ये कयास लगने लगे हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस का साथ छोडक़र वापस भाजपा से गठबंधन करेगी।

हालांकि, शिवसेना जोशी के बयान से किनारा करती हुई दिखाई दे रही है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता नीलम गोरे ने इसे जोशी का यह व्यक्तिगत बयान बताया है। नीलम गोरे ने कहा कि जोशी के बयान को शिवसेना का आधिकारिक बयान नहीं माना जाए।  गौरतलब है शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में लोकसभा में अपना मत दिया था। यह बिल लोकसभा में पास हो चुका है। अब इसे मोदी सरकार राज्यसभा में पेश करेगी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता मनोहर जोशी के बयान से सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है। वहीं, शिवसेना ने इसे उनका निजी बयान बताया है। शिवसेना नेत्री नीलम गोरे ने कहा कि मनोहर जोशी ने भाजपा को लेकर जो बयान दिया है, वह पार्टी का अधिकारिक बयान नहीं है। नीलम ने कहा कि यह पूरी तरह से उनका निजी बयान है। उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी के नेताओं में इस तरह की भावनाओं का होना स्वाभाविक है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में सत्ता संघर्ष को लेकर लगभग एक महीने तक चले सियासी ड्रामे बाद शिवसेना ने भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से नाता तोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई है। लेकिन इस बीच शिवसेना नेता मनोहर जोशी के भाजपा के साथ जाने को लेकर आए बयान ने महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासी बाजी पलटने के संकेत दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में भाजपा और शिवसेना फिर से एक साथ आ सकते हैं।

हालांकि उन्होंने इसका फैसला पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर छोड़ दिया। गौरतलब है कि मनोहर जोशी का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब मंगलवार को नागरिकता संशोधन बिल (कैब) पर शिवसेना और कांग्रेस के बीच गतिरोध दिखाई दिया। हालांकि, इस बीच शिवसेना ने यह कहते हुए गतिरोध को शांत कर दिया कि सब कुछ स्पष्ट होने तक वह कैब का समर्थन नहीं करेगी।

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