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Vrindavan: श्री रंगनाथ जी मंदिर के 180 वर्ष पुराने गरुड़ स्तंभ का होगा पुनरुद्धार; 7 किलो सोने से पुनः किया जाएगा स्वर्ण मंडन

by Tarun Bhardwaj • November 2, 2026
The 180-year-old Garuda Stambha at the Sri Ranganatha Swamy Temple will undergo restoration

Vrindavan: श्री रंगनाथ जी मंदिर के 180 वर्ष पुराने गरुड़ स्तंभ का होगा पुनरुद्धार; 7 किलो सोने से पुनः किया जाएगा स्वर्ण मंडन

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यूनिक समय, वृन्दावन। उत्तर भारत में श्री वैष्णव संप्रदाय के सबसे प्रमुख दिव्यदेश वृंदावन स्थित श्री रंगनाथ जी मंदिर में स्थापित 50 फीट ऊंचे ऐतिहासिक गरुड़ स्तंभ (स्वर्ण स्तंभ) का पहली बार पुनरुद्धार किया जा रहा है। खुले स्थान में स्थित होने के कारण समय के साथ स्तंभ पर चढ़ी स्वर्ण परत का क्षरण होने लगा था। मंदिर के महंत गोवर्धन पीठाधीश्वर बालक स्वामी जी महाराज के संकल्प और इच्छानुसार इसके जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया है।

तीन दिवसीय विशेष ‘बालालयम’ वैदिक अनुष्ठान संपन्न

पुनरुद्धार कार्य का शुभारंभ करने से पूर्व दक्षिण भारतीय विद्वानों के सान्निध्य में तीन दिवसीय विशेष वैदिक अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसे ‘बालालयम’ कहा जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान स्तंभ में विराजमान दिव्य शक्तियों को प्रतीकात्मक छवि चित्र में स्थापित किया गया, ताकि 3 माह तक चलने वाले मरम्मत कार्य के दौरान भी भगवान गरुड़ जी की नित्य पूजा-अर्चना और दर्शन निर्बाध रूप से जारी रह सकें।

जैन बंधुओं के सहयोग से 180 वर्ष पूर्व हुआ था मंदिर निर्माण

ऐतिहासिक संदर्भ के अनुसार, लगभग 180 वर्ष पूर्व स्वामी रंगदेशिक महाराज ने मथुरा के प्रसिद्ध जैन बंधुओं के आर्थिक सहयोग से रंगनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। तभी गर्भगृह के सामने प्रांगण में शाल और सागवान की उत्तम लकड़ी से बने 50 फीट ऊंचे गरुड़ ध्वज स्तंभ की स्थापना की गई थी। ब्रज क्षेत्र में यह मंदिर “सोने के खंभे वाले मंदिर” के नाम से भी प्रसिद्ध है। रामानुज संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, गरुड़ स्तंभ भगवान के दर्शन की प्रथम सीढ़ी माना जाता है।

दक्षिण भारत के कुशल कारीगर 7 किलो सोने से करेंगे स्वर्ण मंडन

स्तंभ के जीर्णोद्धार का कार्य दक्षिण भारत से आए विशेषज्ञ लक्ष्मी नरसिम्हन के नेतृत्व में 10 अनुभवी कारीगरों की टीम द्वारा किया जाएगा। सबसे पहले पाढ़ बांधकर स्तंभ की आंतरिक लकड़ी की स्थिति का आकलन किया जाएगा, जिसके उपरांत स्वर्ण मंडन की प्रक्रिया शुरू होगी। इस संपूर्ण कार्य में लगभग 7 किलोग्राम सोने का उपयोग होगा, जो श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप प्रदान किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह कार्य होली के बाद आयोजित होने वाले वार्षिक ब्रह्मोत्सव से पूर्व पूरा कर लिया जाएगा।

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