
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार, अक्टूबर से राज्य में केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी दी जाएगी, जिनका निर्माण उत्तर प्रदेश में ही हुआ हो। इस बदलाव का उद्देश्य राज्य में ईवी निर्माण इकाइयों को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
पॉलिसी का उद्देश्य और मौजूदा लाभ
यह नई शर्त 14 अक्टूबर से लागू हो सकती है, जब मौजूदा पॉलिसी के तीन साल पूरे होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राज्य की आर्थिक उन्नति में मदद करेगा और राजस्व भी बढ़ाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि 14 अक्तूबर, 2022 को ईवी पॉलिसी प्रदेश में लागू की गई थी। इसके तहत तीन साल तक ईवी खरीद पर शतप्रतिशत टैक्स व पंजीकरण में छूट दी जा रही है। इतना ही नहीं जिन्होंने टैक्स व पंजीकरण शुल्क भर दिया है, उन्हें रिफंड भी किया गया।
मौजूदा ईवी पॉलिसी के तहत
- दोपहिया वाहनों पर ₹5,000 की सब्सिडी।
- चार पहिया वाहनों पर ₹1 लाख की सब्सिडी।
- ई-बसों पर ₹20 लाख तक की सब्सिडी।
- ई-गुड्स कैरियर पर ₹1 लाख की सब्सिडी।
अब तक, राज्य में खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर ₹60 करोड़ की सब्सिडी दी जा चुकी है, जिसका लाभ 17,665 वाहन मालिकों को मिला है। इसके अलावा, ईवी की खरीद पर तीन साल तक टैक्स और पंजीकरण शुल्क में 100% छूट दी जा रही है।
परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने बताया कि प्रदेश में खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी व टैक्स-पंजीकरण में छूट दी जा रही है। अक्तूबर में पॉलिसी के तीन साल पूरे हो जाएंगे। इस संबंध में अंतिम निर्णय शासन द्वारा लिया जाएगा।
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