
यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान की धरती पर 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक का सबसे बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो गया है। बढ़ती महंगाई, चरमराती अर्थव्यवस्था और गिरती मुद्रा के बोझ तले दबी जनता अब सड़कों पर है, लेकिन इस बार विरोध का चेहरा बदल चुका है। ईरान के सभी 31 प्रांतों में जारी इस विद्रोह की कमान अब महिलाओं के हाथ में है, जो धार्मिक सरकार की पाबंदियों की बेड़ियां तोड़कर ‘आजादी’ का बिगुल फूंक रही हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ चौंकाने वाले वीडियो और तस्वीरों में ईरानी युवतियां सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जलती हुई तस्वीरों से सिगरेट जलाती नजर आ रही हैं। यह न केवल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा है, बल्कि उन कड़े कानूनों को सीधी चुनौती है जो दशकों से वहां की महिलाओं पर थोपे गए हैं।
एक साथ तोड़े जा रहे दो बड़े कानून
ईरानी महिलाओं का यह कदम केवल प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि सत्ता की जड़ों पर प्रहार है। ईरान के कानून के तहत खामेनेई की तस्वीर जलाना एक गंभीर अपराध है, जिसकी सजा बेहद सख्त है। ईरान के कई हिस्सों में महिलाओं के सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करने पर वर्षों से प्रतिबंध है। इन दोनों कृत्यों को एक साथ अंजाम देकर महिलाएं संदेश दे रही हैं कि वे अब धार्मिक सरकार के कठोर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबंधों को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। यह कदम 2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए ‘महिला, जीवन, आजादी’ आंदोलन की निरंतरता भी दर्शाता है। तब महिलाओं ने हिजाब जलाकर और बाल काटकर विरोध जताया था, लेकिन अब यह और ज्यादा सत्ता को चुनौती दे रहा है।
धार्मिक व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती
दिसंबर के अंत से शुरू हुआ यह आंदोलन अब हिंसक मोड़ ले चुका है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने के साथ ही लोगों का गुस्सा और बढ़ रहा है। सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं पर पूर्ण पाबंदी लगाकर आवाज दबाने की कोशिश की है, लेकिन सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब यह बता रहा है कि यह 1979 के बाद की सबसे बड़ी चुनौती है। महिलाएं अब सिर्फ आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में बदलाव और व्यक्तिगत आजादी की मांग कर रही हैं।
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