Thu, Jun 25th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

तीन देशों की यात्रा कर लौटे पीएम का शानदार स्वागत, चुनौतियों को चुनौती देना मेरे स्वभाव में :पीएम मोदी

by Raju Chaurasia • May 25, 2023

तीन देशों की यात्रा कर लौटे पीएम का शानदार स्वागत, चुनौतियों को चुनौती देना मेरे स्वभाव में :पीएम मोदी

इस खबर को सुनें • हिंदी

00:00
00:00
Advertisement
Ad

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा कर दिल्ली लौट आए हैं। वह जी7 के शिखर सम्मेलन में शामिल होने जापान गए थे। इसके बाद पापुआ न्यू गिनी फिर ऑस्ट्रेलिया गए। गुरुवार को पीएम के विशेष विमान ने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। एयरपोर्ट पर नरेंद्र मोदी का शानदार स्वागत किया गया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनकी आगवानी की। नरेंद्र मोदी ने बताया कि कोरोना वैक्सीन देने का शुक्रिया दुनिया के लोग किस तरह करते हैं। उन्होंने कहा- “चुनौतियों को चुनौती देना मेरे स्वभाव में है”।

नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर स्वागत करने आए लोगों से कहा, “मैं दुनिया में जाकर आपके पराक्रम के गीत गाता हूं। मेरे देश की महान संस्कृति का गौरव गान करते समय मैं आंखें नीची नहीं करता। आंखें मिलाकर दुनिया से बात करता हूं। ये सामर्थ्य इसलिए है क्योंकि हमारे देश ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई है। जब पूर्ण बहुमत वाली सरकार का प्रतिनिधि विश्व के सामने कोई बात बताता है तो दुनिया विश्वास करती है कि ये अकेला नहीं बोल रहा है 140 करोड़ लोग बोल रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी नड्डा जी कह रह थे मोदी जी को प्यार करने वाले लोग यहां आए हैं। ये मां भारती को प्यार करने वाले लोग हैं। ये हिन्दुस्तान को प्यार करने वाले लोग हैं। हिन्दुस्तान का नाम रोशन होता है तो 140 करोड़ देशवासियों का जज्बा नई ऊंचाइयों को छूने लगता है। आप सुबह तीन बजे से आए हैं। भारत की दुनिया में सही पहचान बने, भारत का दुनिया में जय जयकार हो, तो हिन्दुस्तानी इतना खुशियों के भर जाता है कि रात के तीन बजे यहां पहुंच जाता है।”

पीएम ने कहा, “यात्रा के दौरान जितना भी समय मिला उसका पल-पल देश की बात करने में, देश की भलाई के लिए निर्णय करने में, अपना समय पूरी तरह से उपयोग किया है। 40 से अधिक महत्वपूर्ण लोगों के साथ मिलने का अवसर मिला। जो भी नेता मिलते थे, खासकर जी 7 समूह के नेता वे भारत में टी20 की बैठकों पर बात करते थे। उनके देश के लोग इन बैठकों में आएं हैं। उन्होंने वहां जाकर रिपोर्टिंग की है। उसका बहुत प्रभाव उनके मन में है।”

पीएम मोदी ने कहा, “भारत के महान परंपरा के प्रति आप भी हिन्दुस्तान की संस्कृति पर बोलते समय गुलामी वाली मानसिकता में डूब मत जाना। हिम्मत के साथ बात कीजिए। जब मैं यह कहता हूं कि हमारे तीर्थ क्षेत्र पर हमला स्वीकार्य नहीं है तो दुनिया यह स्वीकार करती है। हिरोशिमा की धरती जहां मानव संहार की घटना घटी थी। उस धरती पर पूज्य बापू की प्रतिमा लगती है तो शांति का संदेश विश्व को जाता है।”

नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया लड़ रही थी, एक-एक व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए एक-एक परिवार जूझ रहा था। संकट बड़ा गहरा था। अंधेरे के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था। विश्व के बड़े-बड़े देश कोविड के सामने घुटने चुके थे। उस पल को याद कीजिए, हमने भी अपने कई परिवारजनों को खोया है। उस दुख को भूल नहीं सकते। लेकिन जब मैं प्रशांत द्वीप के देशों के लोगों से मिला तो हर किसी की आंख में वो चाहे ड्राइवर हो, होटल का कर्मी हो, समारोह के गेट पर खड़ा कोई व्यक्ति हो, सुरक्षा में काम करने वाला जवान हो, हर किसी की आंख में जब हम उससे आंख मिलाते थे वो भाषा तो नहीं जानता था, लेकिन अपनी आंखों से बताता था। कभी कभी तो कंधे की ओर इशारा करके बताता था कि टीका लगा है। आपने टीका दिया, इसलिए हम जिंदा हैं।”

दुनिया के कोटी-कोटी लोगों की जिंदगी भारत की दवाओं ने, भारत के टीने ने बचाई। 140 करोड़ देशवासियों को संभालते-संभालते, हम दूसरों को भी संभालने में पीछे नहीं रहे। हमारे विदेश मंत्री लैटिन अमेरिका के देशों में गए थे। उन्होंने कहा कि मेरा लैटिन अमेरिका के देशों का अनुभव नया है। लोग इशारे से बताते हैं कि हमें वैक्सीन मिला और बच गए। उस समय मुझसे हिसाब मांगा जाता था कि मोदी तुम्हें दुनिया को वैक्सीन देने की क्या जरूरत थी। ये बुद्ध और गांधी की घरती है।”

पीएम ने कहा, “अब चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन चुनौतियों को चुनौती देने मेरे स्वभाव में है। चुनौती दो है। देश को अपने जड़ों को मजबूत करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। अपने गरीब से गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकलाना, उनकी जरूरतें पूरी करना, ज्यादातर लोगों के जीवन में यह काम आता है। हमारे पास दो काम एक साथ आए हैं। दुनिया इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। हमारे सामने विश्व की अपेक्षाओं के अनुरूप भारत को नए शिखर पर ले जाना बहुत बड़ी चुनौती है। विश्व की आशा बढ़ रही है। विश्व की हर समस्या के समाधान में भारत कुछ रास्ता निकाले, भारत उस रास्ते पर हमारे साथ चले, भारत क्या सोच रहा है हमें बताए, दुनिया के हर कोने से यह आवाज आ रही है, लेकिन साथ-साध 140 करोड़ का देश को अपने पिछड़े लोगों को भी समृद्धि की राह पर ले जाना है।”

 

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.