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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बरी 12 आरोपी दोबारा नहीं होंगे गिरफ्तार

by Arpita Singh • July 24, 2025
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यूनिक समय, नई दिल्ली। मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बरी किए गए 12 आरोपियों को दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 24 जुलाई 2025 को यह स्पष्ट किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई बरी करने की राहत के बाद अब इन आरोपियों की पुनः गिरफ्तारी का कोई सवाल ही नहीं उठता।

यह फैसला महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने कहा कि अब जब आरोपियों को रिहा किया जा चुका है, तो उन्हें वापस जेल भेजना संभव नहीं है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन यह फैसला अन्य मामलों में उदाहरण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वह सभी पक्षों को नोटिस जारी करेगा और विस्तृत सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का असर MACOCA (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत चल रहे अन्य मामलों पर नहीं पड़ेगा।

जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार धमाकों ने शहर को झकझोर दिया था, जिसमें 180 से अधिक लोग मारे गए और 800 से ज्यादा घायल हुए थे। मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया के तहत, 2015 में एक विशेष अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से पांच को मौत की सजा और सात को उम्रकैद दी गई थी।

हालांकि, 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए यह विश्वास करना मुश्किल है कि इन लोगों ने अपराध किया।

हाईकोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष बम के प्रकार तक का सटीक विवरण पेश नहीं कर सका और जिन साक्ष्यों पर वह निर्भर था, वे आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में दोषी ठहराए गए कमाल अंसारी की मृत्यु 2021 में नागपुर जेल में कोविड-19 संक्रमण से हो गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, हालांकि फिलहाल सभी आरोपी स्वतंत्र हैं।

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