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World: UNSC की रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब; लाल किला हमले से जुड़ा जैश-ए-मोहम्मद का नाम, अन्य साजिश का भी खुलासा

by Tarun Bhardwaj • February 12, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की ताजा रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के झूठ की पोल खोल दी है। इस रिपोर्ट में न केवल पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के खूनी इतिहास की पुष्टि की गई है, बल्कि भारत के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए हमले में भी इसकी सीधी संलिप्तता का जिक्र किया गया है। भारत के लिए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, क्योंकि यह रिपोर्ट सीधे तौर पर पाकिस्तान के उन दावों को खारिज करती है जिनमें वह आतंकी संगठनों के निष्क्रिय होने की बात कहता रहा है।

लाल किला हमला और ‘जमात-उल-मुमिनात’ की नई साजिश

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद अब महिलाओं को आतंक की दुनिया में धकेलने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जैश के सरगना मौलाना मसूद अज़हर ने “जमात-उल-मुमिनात” नाम से एक समर्पित महिला विंग बनाने का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को जमीनी और लॉजिस्टिक समर्थन देना है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि जैश-ए-मोहम्मद 9 नवंबर को लाल किले पर हुए उस भीषण हमले से जुड़ा था, जिसमें 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

पाकिस्तान का विरोध पड़ा कमजोर

रिपोर्ट तैयार करने के दौरान पाकिस्तान ने अकेले ही इस बात का कड़ा विरोध किया कि जैश-ए-मोहम्मद का नाम शामिल किया जाए। पाकिस्तान का तर्क था कि यह संगठन अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। हालांकि, भारत द्वारा प्रस्तुत पुख्ता सबूतों और अन्य सदस्य देशों के समर्थन के आगे पाकिस्तान की एक न चली और रिपोर्ट में जैश का नाम बरकरार रखा गया।

BLA के मुद्दे पर चीन-पाक गठबंधन को झटका

पाकिस्तान ने एक और चाल चलते हुए बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को अल-कायदा और ISIL जैसे वैश्विक आतंकी समूहों से जोड़कर UNSC की प्रतिबंध सूची में डालने की कोशिश की थी। पाकिस्तान चाहता था कि BLA को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित कराकर बलूचिस्तान में जारी विद्रोह को दबाया जा सके। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक’ (Technical Hold) लगा दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि BLA का अल-कायदा या ISIL के साथ किसी भी प्रकार के संबंध होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

दिलचस्प बात यह है कि चीन अक्सर भारत द्वारा जैश और लश्कर के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों पर ‘तकनीकी रोक’ लगाता रहा है। इस बार अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने वही पैंतरा पाकिस्तान और चीन के खिलाफ अपनाया है। यह न केवल पाकिस्तान की आतंकी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय प्रहार है, बल्कि भारत की बढ़ती कूटनीतिक धमक का भी प्रमाण है।

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