
यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान और इजरायल (अमेरिका) के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक स्तर पर एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस आसन्न संकट से भारत को बचाने और घरेलू रसोई गैस की किल्लत को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। सरकार ने प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश 2026 जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब गैस का वितरण ‘प्राथमिकता’ के आधार पर किया जाएगा।
सप्लाई का नया ‘प्रायोरिटी मॉडल’
सरकार ने गैस की किल्लत को दूर करने के लिए एक नया ‘प्रायोरिटी मॉडल’ तैयार किया है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को चार श्रेणियों में बांटकर गैस का कोटा निर्धारित किया गया है। सबसे ऊपरी श्रेणी यानी प्रायोरिटी सेक्टर 1 में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG और LPG उत्पादन को रखा गया है, जिन्हें पिछले 6 महीने की औसत खपत का 100% कोटा मिलता रहेगा ताकि आम जनता की रसोई और परिवहन प्रभावित न हो।
प्रायोरिटी सेक्टर 2 के अंतर्गत उर्वरक (Fertilizer) प्लांट्स को उनकी औसत खपत का 70% हिस्सा आवंटित किया जाएगा, बशर्ते इस गैस का उपयोग केवल खाद बनाने के लिए ही किया जाए। औद्योगिक क्षेत्र के लिए बनाए गए प्रायोरिटी सेक्टर 3 में चाय उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को उनकी खपत का 80% हिस्सा मिलेगा। अंत में, प्रायोरिटी सेक्टर 4 के तहत सिटी गैस नेटवर्क से जुड़े अन्य कमर्शियल उपभोक्ताओं को भी उपलब्धता के अनुसार 80% सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।
ESMA लागू होने का क्या मतलब है?
Essential Services Maintenance Act (1968) लागू होने के बाद अब गैस सप्लाई से जुड़ी सेवाओं में लगे कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते। यदि सप्लाई चैन में कोई बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करता है, तो सरकार सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसी स्थिति में ईंधन की जमाखोरी रोकना और वितरण को सुचारू बनाए रखना है।
इनकी कटेगी गैस सप्लाई!
प्राथमिक क्षेत्रों (जैसे घर और खाद कारखाने) को गैस देने के लिए सरकार ने पेट्रोकेमिकल यूनिट्स, पावर प्लांट्स और तेल शोधन कंपनियों की सप्लाई में कटौती करने का फैसला किया है। तेल शोधन कंपनियों को अब केवल 65% गैस ही उपलब्ध कराई जाएगी।
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