
यूनिक समय, मथुरा। दीक्षांत समारोह में 69 पशु चिकित्सा स्नातक, 29 जैव प्रौद्योगिकी स्नातक, 74 स्नातकोत्तर तथा 05 पीएचडी विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन में धैर्य और दृढ़ता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में लगभग 44 प्रतिशत छात्राएँ थीं जिसके लिए उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना की और इसे महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी डिग्री को प्राप्त करना केवल एक शैक्षणिक योग्यता नहीं बल्कि एक जीवन पद्धति है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच रखने तथा समाज के उत्थान के लिए अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं में नवीन प्रौद्योगिकियों के समावेशन पर भी प्रकाश डाला।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वन हेल्थ दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला तथा पशु एवं जन स्वास्थ्य के संरक्षण में पशु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने खाद्य गुणवत्ता के महत्व और इसके समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र की सराहना की जो ग्रामीण महिलाओं के विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
एम.वी.एससी के चार तथा पीएचडी का एक श्रेष्ट शोध प्रंबध पुरुस्कार भी प्रदान किया गया। वटेरनरी साइंस में एमवीएससी का श्रेष्ट शोध प्रंबध पुरु स्कार के अलावा बेस्ट टीर्चस एवर्ड भी इस मौके पर प्रदान किए गए।
एमवीएससी के चार पीएचडी एक श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार भी प्रदान किया गया। बेसिक वेटेरिनरी साइंस में एम.वी.एससी. का श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार डॉ प्रिया पचौरी, वेटेरनरी पैरा-क्लिनिकल विषयों में डॉ सोनम कुमारी, एनिमल प्रोडक्शन साइंस में डॉ अरुंधति शर्मा तथा वेटेरिनरी क्लिनिकल विषयों में डॉ अनूप कुमार को प्रदान किया गया। इसी प्रकार वेटेरिनरी क्लिनिकल विषय में पीएचडी का श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार डॉ अनुराधा नीमा को प्रदान किया गया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से डॉ अमिताव भट्टाचार्य (सह आचार्य) को सम्मानित किया गया।
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