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World: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का ‘टैक्स’ प्रहार; जहाजों से वसूलेगा 20 लाख डॉलर तक का ट्रांजिट शुल्क

by Tarun Bhardwaj • March 23, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। ईरान ने दुनिया की ‘आर्थिक जीवन रेखा’ माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण कड़ा करते हुए वहां से गुजरने वाले चुनिंदा जहाजों पर 20 लाख डॉलर (लगभग 18.76 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम ‘ट्रांजिट शुल्क’ लगा दिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सीधी धमकी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान के बिजली ढांचे को तबाह करने की बात कही थी।

ईरान की ‘वसूली’ रणनीति

ईरानी सांसद अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने युद्ध के भारी खर्चों की भरपाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर पारगमन शुल्क (Transit Fee) लागू करने की पुष्टि की है, जिसे उन्होंने दशकों बाद क्षेत्र में एक नए ‘संप्रभु शासन’ की स्थापना और ईरान की बढ़ती ताकत का प्रतीक बताया है; वहीं राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि यह जलमार्ग उनके विरोधियों को छोड़कर अन्य सभी के लिए खुला है, लेकिन इस नए आर्थिक बोझ या ‘वसूली’ की मार सभी को झेलनी पड़ सकती है।

ट्रंप की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के इस अल्टीमेटम ने तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क या बाधा के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिकी सेना ईरान के संपूर्ण बिजली ग्रिड (Power Infrastructure) को ध्वस्त कर देगी; जिसके जवाब में तेहरान ने भी पीछे हटने से इनकार करते हुए साफ कर दिया है कि यदि उसके पावर प्लांट्स पर कोई भी हमला हुआ, तो वह दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को तत्काल और पूरी तरह से बंद कर देगा।

दुनिया पर क्या होगा असर?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिससे दुनिया का लगभग 30% तेल और गैस गुजरता है, पर यदि ईरान पूरी तरह पाबंदी लगाता है या जहाजों पर भारी ‘ट्रांजिट शुल्क’ वसूलता है, तो इसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें रातों-रात दोगुनी हो सकती हैं, जिससे भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर बड़े आयातक देशों के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां सुरक्षा के लिए नए व लंबे समुद्री रास्तों का चुनाव करने पर मजबूर होंगी, जिससे माल ढुलाई की लागत में बेतहाशा वृद्धि होगी।

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