यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे कठोर चेतावनी जारी की है। सोमवार को एक कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक "तर्कसंगत शासन" के साथ सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए गंभीरता से बातचीत तो कर रहा है, लेकिन यदि जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो अंजाम बेहद खौफनाक होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य और आर्थिक घेराबंदी ट्रंप की इस चेतावनी के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो वैश्विक तेल व्यापार का लाइफलाइन माना जाता है। ट्रंप ने शर्त रखी है कि यदि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के आर्थिक ढांचे की रीढ़ तोड़ देगा। उन्होंने सीधे तौर पर ईरान के सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल के कुओं और रणनीतिक 'खर्ग द्वीप' को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दी है। ट्रंप ने तीखे शब्दों में कहा, "हमने इन ठिकानों को अब तक जानबूझकर नहीं छुआ है, लेकिन अब समय आ गया है।" 47 वर्षों के 'आतंक' का बदला अपने बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संभावित हमले को केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक 'प्रतिशोध' के रूप में पेश किया। उन्होंने लिखा कि यह उन असंख्य अमेरिकी सैनिकों और निर्दोष लोगों का बदला होगा, जिन्हें पिछले 47 वर्षों के दौरान ईरानी शासन के कथित आतंक के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका अब सीमित सैन्य कार्रवाई (Limited Strikes) के बजाय ईरान के बुनियादी ढांचे को जड़ से खत्म करने की योजना बना रहा है। बातचीत या पूर्ण युद्ध? हालांकि ट्रंप ने बातचीत में "काफी प्रगति" होने का दावा किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी आशंका जताई कि समझौते की संभावना कम है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप ने 6 अप्रैल तक की जो समय सीमा (Deadline) ऊर्जा ठिकानों पर हमले के लिए बढ़ाई है, वह ईरान के लिए अंतिम अवसर है। यदि कूटनीति विफल रहती है, तो दुनिया एक ऐसे युद्ध की गवाह बन सकती है जो वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल कर रख देगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: अपर नगर आयुक्त’ की बेटी अक्षिता ने PCS परीक्षा में हासिल की 178वीं रैंक; फरह के मनीष भी बने नायब तहसीलदार [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]