Fri, Jun 5th, 2026
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Kanpur Kidney Kand: पंजाब के पीड़ित मनजिंदर का वीडियो आया सामने; 43 लाख रुपये की ठगी का लगाया गंभीर आरोप

by Tarun Bhardwaj • April 6, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में हर दिन रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। जेल भेजे गए आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल से पुलिस को एक ऐसा वीडियो मिला है, जिसने इस ‘खूनी खेल’ की वीभत्सता को जगजाहिर कर दिया है। इस वीडियो में पंजाब के तरनतारन निवासी पीड़ित मनजिंदर अपना दर्द बयां करते हुए आहूजा हॉस्पिटल के संचालकों और उनके गुर्गों पर किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 43 लाख रुपये ठगने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

कई वर्षों से डायलिसिस पर चल रहे मनजिंदर ने अपनी जिंदगी बचाने की उम्मीद में जान-पहचान वालों से कर्ज लेकर यह मोटी रकम जुटाई थी, लेकिन आरोपियों ने न तो उनका ट्रांसप्लांट कराया और न ही पैसे वापस किए। अब कर्जदारों के तगादे और खराब स्वास्थ्य के बीच पीड़ित का सब कुछ लुट चुका है, जिसके बाद पुलिस की एक टीम जांच के लिए चंडीगढ़ रवाना की गई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह का नेटवर्क गाजियाबाद के शातिर लुटेरों और डकैतों तक फैला हुआ था। परवेज सैफी, जो गाजियाबाद में लूट और डकैती के मामलों में जेल जा चुका है, इस गिरोह को ट्रांसप्लांट के लिए गाड़ियां और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराता था। पुलिस को मिले एक 19 सेकंड के वीडियो में परवेज और डॉ. अफजल एक बेड पर बैठे नजर आ रहे हैं, जहाँ 500 रुपये की दर्जनों गड्डियां बिखरी हुई हैं। वीडियो में डॉ. अफजल इन नोटों को हवा में उछालता दिख रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि इन ‘सफेदपोश अपराधियों’ ने मरीजों की मजबूरी को मोटी कमाई का जरिया बना लिया था। मेरठ का अंकित नामक युवक भी इस नेटवर्क में शामिल था, जो डॉक्टरों की टीम को लाने-ले जाने के लिए फर्जी नामों से वाहन बुक करता था।

कानपुर पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने के लिए एंबुलेंस संचालक शिवम अग्रवाल को न्यायालय से रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। डीसीपी वेस्ट एसएन कासिम आबिदी के अनुसार, शिवम की रिमांड से यह साफ हो सकेगा कि आहूजा और मेडिलाइफ जैसे नर्सिंगहोम में अब तक कितने अवैध ट्रांसप्लांट किए गए और इस ‘डेथ नेटवर्क’ में दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के कौन-से बड़े नाम शामिल हैं।

पुलिस डॉ. मुदस्सर अली और डॉ. रोहित की टीम के पिछले कारनामों को भी खंगाल रही है। इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि शहर के बीचों-बीच इतने बड़े पैमाने पर अंगों की तस्करी का काला कारोबार कैसे फल-फूल रहा था।

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