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नेतन्याहू की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने डिलीट किया पोस्ट; इस्राइल को बताया था ‘मानवता का कैंसर’

by Tarun Bhardwaj • April 10, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने बड़बोलेपन के कारण एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। इस्राइल और लेबनान के बीच जारी तनाव पर टिप्पणी करते हुए आसिफ ने इस्राइल के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख उन्होंने अपना सोशल मीडिया पोस्ट हटा लिया है, लेकिन इस्राइल ने इसे ‘बर्दाश्त न करने योग्य’ करार दिया है।

क्या था ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान?

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस्राइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने लेबनान में हो रही हिंसा को ‘नरसंहार’ करार देते हुए इस्राइल को “मानवता के लिए अभिशाप” और “कैंसर” बताया था। उन्होंने कथित तौर पर ‘नरक में जलना’ जैसी बेहद कड़ी और असंसदीय भाषा का भी प्रयोग किया।

आसिफ का यह बयान तब आया जब वह लेबनान में निर्दोष नागरिकों की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुआ, अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की घेराबंदी शुरू हो गई।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का पलटवार

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इस्राइली दूत और पीएम कार्यालय की ओर से जारी बयान में इस्राइल ने कहा कि किसी देश के रक्षा मंत्री द्वारा इस्राइल के विनाश की बात करना और ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह से आपत्तिजनक है।

नेतन्याहू ने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार खुद को शांति का पक्षधर बताती है, उसके मंत्री का ऐसा बयान उसकी असलियत दर्शाता है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दबाव में डिलीट किया पोस्ट

विवाद के तूल पकड़ने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ख्वाजा आसिफ ने चुपचाप अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। हालांकि, अभी तक पाकिस्तान सरकार या रक्षा मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या माफीनामा सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दबाव के कारण आसिफ को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।

पाकिस्तान की कूटनीतिक किरकिरी

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के किसी मंत्री ने इस्राइल को लेकर विवादित बयान दिया हो, लेकिन रक्षा मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ऐसी भाषा ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाया है। सोशल मीडिया पर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है, जहाँ यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या यह बयान देने से पहले उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और वैश्विक दबाव के बारे में सोचा था?

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