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Nashik TCS Case: आरोपी निदा खान को कोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत; अब अगली सुनवाई 27 अप्रैल को

by Tarun Bhardwaj • April 20, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के नासिक में एक आईटी कंपनी टीसीएस के कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के मामले में आज नासिक रोड कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की मुख्य आरोपी और कंपनी की पूर्व प्रोसेस एसोसिएट निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर जिला जज केजी जोशी की बेंच ने सुनवाई की। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल निदा को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

तीखी बहस और गोपनीय कार्यवाही

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट प्रोसिडिंग को कॉन्फिडेंशियल (गोपनीय) रखने की अपील की। निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने कोर्ट में मेडिकल ग्राउंड्स का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि निदा खान गर्भवती (प्रेग्नेंट) हैं, इसलिए उन्हें मानवीय आधार पर अंतरिम राहत दी जानी चाहिए।

सरकारी पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट के सामने बीपीओ की पिकनिक और ट्रिप से जुड़े कुछ फोटोग्राफ साक्ष्य के रूप में पेश किए। कोर्ट में मुख्य रूप से निदा खान पर लगाए गए एट्रोसिटी एक्ट (SC-ST Act) की धाराओं पर लंबी बहस हुई।

पुलिस का दावा

नासिक पुलिस इस मामले को लेकर काफी गंभीर है। पुलिस के अनुसार, कंपनी के भीतर कर्मचारियों के धर्मांतरण के खेल में निदा खान की भूमिका बेहद अहम रही है। पुलिस ने इस मामले में न केवल धर्मांतरण बल्कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया है, जिससे जमानत मिलना कठिन हो गया है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकरण में कई अन्य कर्मचारी भी पीड़ित हैं, लेकिन सामाजिक दबाव और डर की वजह से वे अभी सामने नहीं आ रहे हैं। पुलिस को अपनी जांच और सबूतों पर पूरा भरोसा है।

अब 27 अप्रैल पर टिकी निगाहें

निदा खान के वकील का कहना है कि अग्रिम जमानत की प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए उन्होंने तुरंत राहत के लिए अंतरिम जमानत की अर्जी दी थी। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की है। तब तक निदा खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है।

नासिक का यह धर्मांतरण मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें एक कॉर्पोरेट वर्क कल्चर के बीच कथित तौर पर धार्मिक एजेंडा चलाने के आरोप लगे हैं।

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