यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की नवगठित शुभेंदु अधिकारी सरकार राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या प्रवासियों को लेकर पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए अपने सबसे बड़े वादे को अमलीजामा पहनाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों को बेहद सख्त लहजे में अंतिम चेतावनी जारी की है। राज्य में लागू की गई नई 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' (पहचान करो, नाम हटाओ और देश से निकालो) नीति के बाद सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है, जिसके चलते अब अवैध प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह खुद ही वापस बांग्लादेश भागने के लिए इंटरनेशनल बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। हम अपना पैसा इन्हें जेल में रखने में क्यों बर्बाद करें?— मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अवैध प्रवासियों को सीधे और कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "जितनी जल्दी हो सके, यहाँ से भाग जाओ। हम इन अवैध प्रवासियों को जेल में रखकर सरकारी पैसे पर मुफ्त का खाना नहीं खिलाना चाहते हैं। हमारे करदाताओं का पैसा इन्हें जेलों में पालने के लिए क्यों बर्बाद होना चाहिए? हमने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट और कड़े निर्देश दे दिए हैं कि जहाँ भी ये अवैध नागरिक मिलें, इन्हें पकड़कर सीधे सीमा पार बांग्लादेश भेजा जाए।" मुख्यमंत्री के इस तीखे बयान से साफ है कि राज्य की नई सरकार अब तुष्टिकरण की नीति को पूरी तरह खत्म कर प्रशासनिक हंटर चलाने के मूड में है। सभी जिलों में बनेंगे 'होल्डिंग सेंटर' इस महा-अभियान को व्यवस्थित रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक और बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं को उनके देश वापस भेजने से पहले अस्थाई रूप से रखने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' (डिटेंशन सेंटर) बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को लिखित आदेश और विस्तृत गाइडलाइंस भेज दी गई हैं। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पाबंद किया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों के निर्माण के लिए तत्काल उपयुक्त सरकारी जमीन या जगहों की पहचान करें और आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई को युद्ध स्तर पर शुरू करें। प्रशासनिक कार्रवाई का खौफ बीजेपी सरकार की इस सख्त 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति का असर अब जमीन पर भी साफ दिखने लगा है। राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक बड़े प्रशासनिक ऑपरेशन का रूप ले लिया है। उत्तर 24 परगना और मालदा जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों से आ रही तस्वीरें और वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सरकार के खौफ से अवैध प्रवासी खुद ही वापस लौट रहे हैं। उत्तर 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह एक हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला, जब 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं अचानक वहां इकट्ठा हो गए। बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे ये लोग सरकार द्वारा होल्डिंग सेंटर बनाने और देश से निकालने की हालिया घोषणाओं से इस कदर डर गए कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके खुद ही अपने वतन लौटने की गुहार लगाने लगे। अमित शाह के 'असम फॉर्मूले' पर बंगाल में काम शुरू गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस साल संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सूबे की जनता से राज्य को पूरी तरह घुसपैठ मुक्त बनाने का पुरजोर वादा किया था। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने कई संबोधनों में हुंकार भरते हुए साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में कड़े कदम उठाकर घुसपैठ को लगभग पूरी तरह से खत्म कर दिया है, ठीक उसी असम फॉर्मूले की तर्ज पर बंगाल में भी अवैध घुसपैठ को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा। अब राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, सरकार अपनी पहली ही कैबिनेट प्राथमिकताओं में इस वादे को पूरा करने में पूरी ताकत से जुट गई है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: नौहझील में पति ने सोती हुई पत्नी की चाकू से गला रेतकर की हत्या; आरोपी फरार, तलाश में जुटी पुलिस [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]