यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व महान कप्तान और 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के नाम से मशहूर सौरव गांगुली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम बंगाल राज्य प्रशासन ने एक हालिया सुरक्षा समीक्षा (Security Review) के बाद सौरव गांगुली की सुरक्षा में भारी कटौती करने का फैसला किया है। पूर्व बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष और मौजूदा समय में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष सौरव गांगुली की सुरक्षा को अब 'Z' (जेड) कैटेगरी से घटाकर 'Y' (वाई) कैटेगरी में डाउनग्रेड कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले खतरे के आकलन (Threat Assessment) के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसने बंगाल के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। ममता सरकार ने दी थी जेड प्लस सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सौरव गांगुली को साल 2023 में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान 'Z' श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा प्रदान की गई थी। उस समय दादा की सुरक्षा का घेरा बेहद मजबूत था, जिसमें करीब 30 से 35 सशस्त्र पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहते थे। इसके साथ ही जब भी सौरव गांगुली कहीं बाहर निकलते थे, तो उनके पूरे काफिले के साथ आगे-आगे एक एस्कॉर्ट/पायलट वाहन भी चलता था। अब नई 'Y' कैटेगरी की सुरक्षा व्यवस्था लागू होने के बाद उनके सुरक्षाकर्मियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ जाएगी और उनके काफिले से वीआईपी गाड़ियां और अतिरिक्त गनर हटा लिए जाएंगे। शुभेंदु सरकार की नई नीति राज्य सरकार के इस कड़े कदम को पश्चिम बंगाल में हाल ही में बदले राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वीआईपी सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि सरकारी गनर या अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था किसी 'भौकाल' या स्टेटस सिंबल के लिए नहीं दी जाएगी। सुरक्षा केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिलेगी, जिनके लिए खुफिया विभाग के आकलन में वास्तविक सुरक्षा खतरा (Genuine Threat) पाया जाएगा। इसी नई नीति के तहत राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी सहित कई अन्य बड़े नेताओं, मंत्रियों और पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है, जिसके तहत कई लोगों की सुरक्षा में काट-छांट की गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज सौरव गांगुली का नाम लंबे समय से बंगाल की सक्रिय राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है। साल 2021 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) उन्हें बंगाल में अपने सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में पेश करना चाहती थी। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में गांगुली के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन सौरव गांगुली ने हमेशा खुद को सक्रिय राजनीति की पिच से दूर रखा। इसके बावजूद भाजपा के साथ उनके संबंध मधुर रहे और साल 2023 में उन्हें भाजपा शासित राज्य त्रिपुरा का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया था। दूसरी ओर, गांगुली ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों को बेहद संतुलित बनाए रखा। वे ममता बनर्जी के स्पेन दौरे पर भी उनके साथ गए थे और बंगाल में औद्योगिक निवेश से जुड़े कई बड़े सरकारी मंचों पर नजर आए थे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि टीएमसी और भाजपा दोनों के साथ समान दूरी और संतुलन बनाए रखने की गांगुली की पुरानी रणनीति को अब राज्य की नई सरकार अलग नजरिए से देख रही है। फैसले पर सौरव गांगुली की चुप्पी बरकरार भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल और आक्रामक कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली की ओर से सुरक्षा में की गई इस कटौती को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 'दादा' फिलहाल अपना पूरा ध्यान क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के प्रशासनिक कार्यों और खेल गतिविधियों पर केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, खेल जगत की इतनी बड़ी हस्ती की सुरक्षा कम किए जाने के इस फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: रणवीर सिंह विवाद में FWICE का बड़ा यू-टर्न; ‘डॉन 3’ विवाद के बीच असहयोग आंदोलन तत्काल प्रभाव से लिया वापस ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]