यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी भीषण तनाव, युद्ध और सैन्य गतिविधियों के बीच वैश्विक शांति की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान के बीच एक बहुप्रतीक्षित शांति समझौते (Peace Deal) पर अंतिम सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान सरकार ने इस ऐतिहासिक समझौते की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस शांति समझौते के तहत दोनों देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी सैन्य कार्रवाइयों और युद्ध को तत्काल व स्थायी रूप से समाप्त करने का एक बड़ा और निर्णायक निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आगामी शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में आयोजित किया जाएगा। हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधि इस शांति समझौते को फिलहाल एक सहमति पत्र (MoU) का नाम दिया गया है, जिसे रविवार को अंतिम रूप दिया गया। आगामी 19 जून को जेनेवा में होने वाले इस हाई-प्रोफाइल हस्ताक्षर समारोह में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) शामिल होंगे, जबकि ईरान की ओर से वहां के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ कूटनीतिक मंच पर मौजूद रहकर डील को आधिकारिक रूप देंगे। इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में मध्यस्थ देशों की भूमिका बेहद सराहनीय रही है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कतर के नेतृत्व की विशेष रूप से प्रशंसा की है, साथ ही सऊदी अरब और तुर्किये के योगदान को भी सराहा है। तीन चरणों में लागू होगी यह महाडील अमेरिका और ईरान के बीच बनी इस पीस डील को सुचारू रूप से अमलीजामा पहनाने के लिए इसे मुख्य रूप से 3 चरणों में विभाजित किया गया है: पहला चरण (14 जून): MoU की घोषणा के साथ ही सभी फ्रंट पर युद्ध तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है और ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दूसरा चरण (30 दिन के भीतर): होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका, ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई कुल 24 बिलियन डॉलर की संपत्तियों में से पहली किस्त के रूप में 12 बिलियन डॉलर की राशि जारी करेगा। तीसरा चरण (60 दिन के भीतर): दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद ईरान को उसकी शेष 12 बिलियन डॉलर की राशि भी वापस सौंप दी जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस ऐतिहासिक कामयाबी का जश्न मनाते हुए लिखा, "यह महान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लेकर आएगा। अब अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटा लिया जाएगा।" उन्होंने वैश्विक व्यापार जगत को संदेश देते हुए बेहद कड़क अंदाज में लिखा— "दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो।" होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह मुक्त होने की घोषणा के बाद से ही वैश्विक तेल बाजार में नरमी देखी जा रही है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ईरान की 14 सूत्रीय मांगें और समझौते की मुख्य शर्तें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी सैन्य कार्यवाहियों को तुरंत और हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा। 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी की जाएगी, जिसका आधा हिस्सा (12 अरब डॉलर) बातचीत शुरू होने से पहले ही दे दिया जाएगा। ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का दखल नहीं दिया जाएगा और उसकी संप्रभुता का पूरा सम्मान होगा। अमेरिका आगामी 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास के क्षेत्रों से अपने सैन्य बलों को वापस बुला लेगा। ईरानी व्यवस्था के तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की अनुमति होगी और नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लिया जाएगा। ईरान को अपने परमाणु हथियार न बनाने और इस संबंधी पुराने वादे पर पूरी तरह कायम रहना होगा। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की बड़ी योजनाएं पेश करेंगे। ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित निर्यातों पर लगे कड़े प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा, ताकि तेहरान को अपनी इस कमाई पर पूरा अधिकार मिल सके। दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चा केवल संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम के भविष्य, यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण के मुद्दों तक ही सीमित रहेगी। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों को मिल रहे समर्थन जैसे संवेदनशील विषयों को इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। शांति वार्ता के चलने तक अमेरिका इस क्षेत्र में न तो अपनी अतिरिक्त सेना तैनात करेगा और न ही ईरान पर कोई नया आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। समझौते की सभी शर्तों को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से लागू करने और उन पर पैनी नजर रखने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम (निगरानी तंत्र) बनाया जाएगा। दोनों देशों के बीच फाइनल होने वाले इस पूरे समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूरी दिलाई जाएगी। ईरान को अपने सभी वित्तीय और आर्थिक संसाधनों का अपनी इच्छानुसार स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने की पूरी छूट मिलेगी। ईरान ने कहा— "यह हमारी कूटनीतिक जीत" इस समझौते पर ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान इस 60 दिनों की वार्ता में तभी पूरी तरह आगे बढ़ेगा, जब वह वॉशिंगटन की ओर से प्रतिबंध हटाने और संपत्तियों को जारी करने संबंधी प्रतिबद्धताओं का जमीनी स्तर पर सत्यापन कर लेगा। वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए कहा है कि सेना के अथक प्रयासों और जनता के समर्थन के चलते कई महीनों की कठिन बातचीत के बाद आखिरकार अमेरिका को इस शांति समझौते के लिए मेज पर आना पड़ा है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: पेपर लीक और बेरोजगारी पर कांग्रेस का हल्लाबोल; राहुल गांधी 17 जून को कोटा से करेंगे देशव्यापी आंदोलन का शंखनाद ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]