यूनिक समय, नई दिल्ली। फुटबॉल के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शुमार पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी उठाने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया है। 7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप के रोमांचक 'राउंड ऑफ 16' मुकाबले में स्पेन ने पुर्तगाल को 0-1 से मात देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दिल तोड़ने वाली हार के साथ ही 41 वर्षीय रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर समाप्त हो गया है। मैच के बाद भावुक रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, हालांकि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की बात से फिलहाल इनकार किया है। इंजरी टाइम में मिकेल मेरिनो ने किया गोल स्पेन और पुर्तगाल के बीच खेला गया यह नॉकआउट मुकाबला बेहद कड़ा और सांसें रोक देने वाला रहा। दोनों ही टीमों के डिफेंस ने शानदार खेल दिखाया, जिसके चलते तय 90 मिनट तक मुकाबला 0-0 की बराबरी पर खड़ा था। मैच अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिख रहा था, लेकिन तभी दूसरे हाफ के इंजरी टाइम (स्टॉपेज टाइम) में स्पेन के सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मिकेल मेरिनो ने एक जादुई गोल दागकर पुर्तगाल को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इस एकलौते गोल ने जहां स्पेन को क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया, वहीं रोनाल्डो और पुर्तगाल के करोड़ों फैंस के दिल तोड़ दिए। भावनाओं में बहकर संन्यास का फैसला नहीं करूंगा: रोनाल्डो इस दर्दनाक विदाई के बाद क्रिस्टियानो रोनाल्डो मैदान पर बेहद मायूस और भावुक नजर आए। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए रोनाल्डो ने कहा, "इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का बेहद दुख है। मैंने मैदान पर अपना सबकुछ झोंक दिया और मैं एक साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं। हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास शांत दिमाग से सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा। मैं इस हार की निराशा में या भावनाओं में बहकर संन्यास का कोई जल्दबाजी भरा फैसला नहीं लूंगा।" रोनाल्डो के इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि भले ही वे आगे कभी विश्व कप में नजर न आएं, लेकिन वे पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम की जर्सी में कुछ और समय तक खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं। मैच का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि स्पेन की टीम थोड़ी भाग्यशाली रही, यह मुकाबला इतना बराबरी का था कि किसी भी करवट बैठ सकता था। छह वर्ल्ड कप खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इस टूर्नामेंट में उतरने के साथ ही एक नया इतिहास रचा था। वे फुटबॉल इतिहास में रिकॉर्ड 6 बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी बने। इस विश्व कप में भी उन्होंने अपनी टीम के लिए 3 बेहतरीन गोल दागे, लेकिन अपनी टीम को चैंपियन बनाने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। दो दशक से अधिक लंबे इंटरनेशनल करियर में रोनाल्डो अपनी टीम को कभी वर्ल्ड कप के फाइनल तक भी नहीं पहुंचा सके। पुर्तगाल को दिए 3 बड़े खिताब भले ही रोनाल्डो के कैबिनेट में विश्व कप की ट्रॉफी न सज सकी हो, लेकिन पुर्तगाल फुटबॉल में उनके ऐतिहासिक योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। रोनाल्डो ने अपनी विरासत को याद दिलाते हुए कहा, "मैंने पुर्तगाल के लिए तीन बड़े खिताब जीते हैं। मेरे आने से पहले पुर्तगाल ने इतिहास में एक भी बड़ा खिताब नहीं जीता था। हमारे देश का सबसे बड़ा खिताब यूरो 2016 था, जो मेरे लिए किसी वर्ल्ड कप से कम नहीं है।" गौरतलब है कि रोनाल्डो की ही कप्तानी में पुर्तगाल ने साल 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप (यूरो कप) जीतकर इतिहास रचा था। इसके बाद उन्होंने 2019 और फिर साल 2025 में पुर्तगाल को 'यूईएफए नेशन्स लीग' की चमचमाती ट्रॉफी भी दिलाई। पांच बार 'बैलन डी'ओर' (Ballon d'Or) का खिताब जीतने वाले रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में दुनिया का हर रिकॉर्ड अपने नाम किया है, लेकिन फुटबॉल का यह 'धुरंधर' विश्व कप की ट्रॉफी चूमे बिना ही इस महामंच से विदा हो गया। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विरोध में आज सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस; निकालेगी पदयात्रा ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]