यूनिक समय, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने होम लोन और अन्य लोन से जुड़ी अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में बदलाव करने का फैसला किया है। बैंक द्वारा जारी की गई नई दरें आज यानी 7 जुलाई 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो गई हैं। अगर आपका होम लोन एचडीएफसी बैंक से चल रहा है या आप नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। बैंक ने इस बदलाव के तहत कुछ चुनिंदा समयावधि (टेन्योर) के लिए ब्याज दरों को घटाया है, जबकि कुछ महत्वपूर्ण टेन्योर के लिए दरों में बढ़ोतरी कर दी है। HDFC बैंक की नई MCLR दरें एचडीएफसी बैंक की ओर से संशोधित की गई दरें अब न्यूनतम 8.05 फीसदी से लेकर अधिकतम 8.70 फीसदी के दायरे में आ गई हैं, जिसके तहत बैंक ने सबसे महत्वपूर्ण 1 साल की एमसीएलआर दर में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है जिससे यह दर 8.40 फीसदी से बढ़कर 8.45 फीसदी हो गई है और लंबी अवधि के 3 साल के लोन टेन्योर में भी 5 बेसिस प्वाइंट का इजाफा होने से यह 8.65 फीसदी से बढ़कर 8.70 फीसदी पर पहुँच गई है। इसके विपरीत बैंक ने केवल ओवरनाइट लोन के लिए एमसीएलआर को 5 बेसिस प्वाइंट घटाया है जो अब 8.10 फीसदी से कम होकर 8.05 फीसदी पर आ गई है, जबकि 1 महीने, 3 महीने, 6 महीने और 2 साल की अवधि वाली एमसीएलआर दरों को पूरी तरह स्थिर रखा गया है और ये दरें पहले की तरह क्रमशः 8.05 फीसदी, 8.20 फीसदी, 8.35 फीसदी और 8.55 फीसदी पर ही बनी रहेंगी। आम ग्राहकों और होम लोन लेने वालों पर क्या होगा असर? बैंकिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आमतौर पर सभी बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें तय करने के लिए 1 साल की MCLR को ही मुख्य बेंचमार्क या आधार मानते हैं। ऐसे में जिन भी मौजूदा ग्राहकों का होम लोन 1 साल की एमसीएलआर दर से लिंक्ड (जुड़ा) है, उनकी अगली ब्याज दर समीक्षा (रीसेट डेट) के समय मंथली EMI की राशि बढ़ सकती है या फिर उनके लोन की समयावधि (लोन टेन्योर) को बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस बदलाव का सटीक असर हर ग्राहक की लोन शर्तों, बची हुई लोन अवधि और एग्रीमेंट के हिसाब से अलग-अलग तय होगा। क्या होती है MCLR दर? MCLR का पूरा नाम 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट' है। यह वह आधिकारिक न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके नीचे कोई भी भारतीय बैंक अपने ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2016 में कमर्शियल बैंकों के लिए इस सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू किया था, ताकि केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में किए जाने वाले बदलावों का सीधा और त्वरित फायदा या नुकसान आम उपभोक्ताओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके। बेस रेट और BPLR में भी हुआ था संशोधन एमसीएलआर में किए गए इस बदलाव से पहले, एचडीएफसी बैंक ने बीते 24 जून 2026 को अपने बेस रेट और बीपीएलआर दरों में कटौती की थी। बैंक ने अपने बेस रेट को 8.80 फीसदी से घटाकर 8.70 फीसदी किया था, जबकि बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) को भी 17.30 फीसदी से कम करके 17.20 फीसदी कर दिया था। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Shailesh Lodha की बेटी स्वरा की जोधपुर के उम्मेद भवन में हुई रॉयल वेडिंग; बारात का स्वागत करते दिखे विक्की कौशल ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]