यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम (सीजफायर) महज तीन हफ्ते के भीतर ही पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच रातभर भीषण मिसाइल और हवाई हमलों का दौर चला। नाटो (NATO) सम्मेलन में हिस्सा लेने अंकारा गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को बड़ा एलान करते हुए ईरान के साथ किए गए समझौते (MoU) को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया और साफ लहजे में कहा— "मेरे हिसाब से, अब सब खत्म हो चुका है।" ट्रंप का तीखा हमला अंकारा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शीर्ष नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा और व्यक्तिगत हमला बोला। ट्रंप ने ईरानी नेताओं को 'झूठा', 'धोखेबाज' और 'बौद्धिक रूप से बीमार' करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत करना सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी है। ट्रंप ने ईरान में जनवरी में हुए बड़े जन-विद्रोह का जिक्र करते हुए कहा, "ईरान की सत्ता में बैठे लोग शैतानी हैं, उन्होंने अपनी ही जनता पर क्रूर अत्याचार किए और विरोध प्रदर्शन करने वाले करीब 54,000 बेकसूर लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लोग पूछते हैं कि वहां सरकार क्यों नहीं बदली? वह इसलिए नहीं बदली क्योंकि जो लोग बदलाव चाहते थे, उन्हें इन तानाशाहों ने मार डाला। ऐसे गंदे खिलाड़ियों को मैं बिल्कुल पसंद नहीं करता।" 'हर बार तुम मारोगे, हम दोगुनी ताकत से मारेंगे' होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों का तुरंत जवाब देते हुए अमेरिकी सेना ने रातभर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की। इस सैन्य कार्रवाई पर मुहर लगाते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने कल रात उन्हें बहुत जोरदार तरीके से मारा है। मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हर बार तुम मारोगे, तो हम पलटकर मारेंगे। वे गंदे खेल खेलते हैं, इसलिए वे सब पर हमला करते हैं, शायद आगे मुझ पर भी करें, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे। हमारा एकमात्र लक्ष्य ईरान का पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण (Nuclear Disarmament) है और हम इसे हर हाल में पूरा करके रहेंगे।" NATO देशों पर भी बरसे अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और मित्र देशों की जमकर क्लास लगाई। ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह नाटो के रवैये से बिल्कुल खुश नहीं हैं, क्योंकि दुनिया में आतंकवाद को सबसे बड़े स्तर पर प्रायोजित (State-Sponsored Terror) करने वाले देश यानी ईरान के खिलाफ इस लड़ाई में नाटो ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। हालांकि, कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद न होने का संकेत देते हुए ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि वे अमेरिका की ओर से अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने का आखिरी मौका जरूर देंगे। खामेनेई के दफ्न समारोह पर मंडराया संकट गौरतलब है कि कुछ दिन पहले तक ईरान के प्रति नरम रुख दिखाने वाले ट्रंप के इस अचानक बदले तेवरों से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। दरअसल, अमेरिका ने पहले वादा किया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुलुल्लाह खामेनेई के मातम के कार्यक्रमों तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हुए ईरानी हमलों ने इस सीजफायर की धज्जियां उड़ा दीं। अब स्थिति यह है कि 9 जुलाई को तेहरान में होने वाले खामेनेई के अंतिम दफ्न समारोह को शांतिपूर्वक संपन्न कराना भी ईरानी प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर और बड़ी चुनौती बन गया है। मध्य पूर्व में मंडरा रहे इस महायुद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Dada: The Sourav Ganguly Story: सौरव गांगुली के जन्मदिन पर ‘दादा’ का फर्स्ट लुक पोस्टर आउट; इस तारीख को होगी रिलीज ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]