यूनिक समय, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सभी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को संबंधित जिला पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह व्यवस्था नई पंचायतों के गठन तक जारी रहेगी। पंचायती राज विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर सरकार ने मुहर लगाते हुए शुक्रवार रात आदेश जारी किया। वर्ष 2021 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों की पहली बैठक 12 जुलाई 2021 को हुई थी। इसी आधार पर उनका पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है। इसके बाद अब नई व्यवस्था के तहत निवर्तमान अध्यक्ष ही पंचायतों का संचालन संभालेंगे। सरकार ने इससे पहले ग्राम पंचायत प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की थी। 26 मई को ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। इससे पहले पंचायतों में प्रशासक की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी जाती थी, लेकिन इस बार निवर्तमान जनप्रतिनिधियों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला पंचायत अध्यक्षों के बाद अब क्षेत्र पंचायत यानी ब्लॉक प्रमुखों को लेकर भी जल्द निर्णय होने की संभावना है। ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि सरकार जिला पंचायतों की तरह ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक की जिम्मेदारी दे सकती है। इसके लिए 18 जुलाई को आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार के इस फैसले से पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों में निरंतरता बनी रहेगी। नई पंचायतों के गठन और आगामी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान व्यवस्था के तहत कामकाज संचालित किया जाएगा। हालांकि, ब्लॉक प्रमुखों को लेकर अंतिम आदेश शासन की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। पंचायत चुनावों को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।