यूनिक समय, नई दिल्ली। NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 डिजिटल सबूतों के आधार पर चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। CBI की जांच के अनुसार, नीट परीक्षा से तीन दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए गए थे। इस पूरे रैकेट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े विषय विशेषज्ञ, कोचिंग संचालक और बिचौलिए शामिल थे, जिन्होंने गोपनीयता की शपथ तोड़कर करोड़ों रुपये का कारोबार चलाया। गोपनीयता की शपथ तोड़कर चलाई गई "स्पेशल क्लास" CBI के अनुसार, केमिस्ट्री के विषय विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में छात्रों के लिए विशेष क्लास चलाई। 'माय गेट' ऐप रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल (CDR) से इस बात की पुष्टि हुई है कि छात्र कुलकर्णी के घर पहुंचे थे, जहां उन्हें परीक्षा में आने वाले हुबहू प्रश्न और उत्तर लिखवाए गए। परीक्षा के बाद एक संतुष्ट अभिभावक ने कुलकर्णी को घड़ी गिफ्ट करने की इच्छा जताई, क्योंकि परीक्षा में वही सवाल आए थे जो क्लास में बताए गए थे। इसी तरह लातूर में भी विशेष क्लास दी गई, जहां मनीषा गुरुनाथ मंडारे पर आरोप है कि उन्होंने घर पर बायोलॉजी की क्लास लगाकर नई NCERT किताबों में खास पैराग्राफ चिन्हित करवाए थे। 25 हजार रुपये में फिजिक्स का पेपर लीक चार्जशीट के मुताबिक, फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार ने गोपनीयता की शपथ के बावजूद महज 25 हजार रुपये लेकर परीक्षा से आठ दिन पहले हाथ से लिखे सवाल आरोपी तेजस शाह को लिखवाए थे। मनीषा वाघमारे इस नेटवर्क में छात्रों और विशेषज्ञों के बीच मुख्य कड़ी की भूमिका निभा रही थीं, जिन्होंने अभिभावकों से 4 लाख रुपये तक वसूल कर छात्रों को ऑफलाइन क्लासों में भेजा और WhatsApp के जरिए फिजिक्स के लीक सवाल पहुंचाए। इसके साथ ही, परीक्षा में वही सवाल मिलने पर 50 हजार रुपये अतिरिक्त मांगने की शर्त भी रखी गई थी। राजस्थान के सीकर में बांटी गई PDF राजस्थान के सीकर में एक कोचिंग नेटवर्क के जरिए परीक्षा से ठीक एक दिन पहले 2 मई की रात 40 से 50 छात्रों को "सम्भावित प्रश्नपत्र" बताकर PDF फाइल बांटी गई थी। आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए WhatsApp ग्रुप्स के नाम "NEET 2026" और "FIFA World Cup 2026" रखे थे, जबकि NTA के मास्टर सेट के लिए "कैलाश" और "शिवालिक" जैसे कोड नेम का इस्तेमाल किया गया था। CBI का दावा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की साजिश अक्टूबर 2025 से ही रची जा रही थी और इसके लिए किस्तों में लाखों रुपये नकद व ऑनलाइन माध्यम से वसूले गए थे। NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल CBI ने अपनी जांच में NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाए हैं, क्योंकि प्रश्नपत्र अनुवाद के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था और परिसरों में मेटल डिटेक्टर व प्रॉपर चेकिंग का भारी अभाव था। दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि बायोलॉजी के लीक सवाल असली पेपर से 90% और केमिस्ट्री के सवाल लगभग 100% तक मेल खाते हैं। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 3 मई 2026 को परीक्षा समाप्त होते ही सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने लीक PDF और असली प्रश्नपत्र का मिलान करके NTA महानिदेशक को ईमेल भेजा, जिसके बाद यह जांच शुरू हुई और फिलहाल इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: रणबीर कपूर की एक्टिंग के कायल हुईं अदिति राव हैदरी; अभिनेता को बताया अपना पसंदीदा एक्टर्स में से एक ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]