यूनिक समय, नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में जारी भारी हंगामे और तीखी बहस के बीच केंद्र सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA Bill, 2026) संशोधन विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया है। लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। हालांकि, प्रस्ताव पेश होते ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोकझोंक देखने को मिली। सदन में जोरदार बहस प्रस्ताव पेश होते ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार यह विधेयक ला रही है और विपक्ष इसके कड़े खिलाफ है। वहीं, विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी रूप में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, बल्कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 31 सदस्यीय जेपीसी का गठन और कार्यप्रणाली पारित प्रस्ताव के अनुसार, एफसीआरए संशोधन विधेयक की गहन समीक्षा करने के उद्देश्य से 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में कुल 21 सांसद लोकसभा से शामिल होंगे जिनका चयन लोकसभा अध्यक्ष करेंगे, जबकि 10 सांसदों का चयन राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाएगा। जेपीसी की आधिकारिक बैठकों के सफल संचालन के लिए कुल सदस्यों में से न्यूनतम एक-तिहाई (1/3) सदस्यों की उपस्थिति का कोरम होना अनिवार्य रखा गया है। इसके अलावा, समिति की बैठकों और समूची कार्यप्रणाली पर लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम लागू रहेंगे, जिनमें आवश्यकता पड़ने पर अध्यक्ष द्वारा संशोधन भी किए जा सकेंगे। शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह में आएगी रिपोर्ट संयुक्त संसदीय समिति को अपनी विस्तृत जांच, हितधारकों से परामर्श और गहन समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट संसद के आगामी शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। लोकसभा ने राज्यसभा से भी सिफारिश की है कि वह इस समिति में शामिल होकर अपने 10 सदस्यों के नामों की औपचारिक घोषणा जल्द करे। क्यों पड़ी जेपीसी के पास भेजने की जरूरत? 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले एनजीओ, धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं और ट्रस्टों के नियमन को लेकर बेहद कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द, समाप्त या सरेंडर होता है, तो विदेशी धन से बनाई गई उसकी समस्त संपत्तियों को एक सरकारी प्राधिकरण के अधीन करने का प्रावधान है, वहीं नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा को 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि, विपक्ष और कई प्रमुख धार्मिक संस्थाओं ने इन प्रावधानों को अत्यधिक कठोर बताते हुए चिंता जताई थी कि इससे नौकरशाही को मनमाने अधिकार मिल जाएंगे। इसी लगातार बढ़ते विरोध और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इसे जेपीसी के पास भेजने का व्यावहारिक कदम उठाया है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Ronaldo Wedding: क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने जॉर्जिना रोड्रिग्ज से की शादी; 10 साल के रिलेशनशिप के बाद कोर्ट मैरिज ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]