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महाराष्ट्र: तीन जिलों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, तीसरी लहर की चेतावनी!

by यूनिक समय • June 20, 2021
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मुंबई। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर लगभग थम सी गई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। महाराष्ट्र में कोरोना के नए वेरिएंट दिखे हैं। इसे डेल्टा प्लस का नाम दिया गया है। बता दें कि कोरोना का ये नया रूप डेल्टा वेरिएंट ((B.1.617.2) ) में ही म्यूटेशन के बाद दिखा है। इस नए वेरिएंट के सैंपल फिलहाल महाराष्ट्र के तीन क्षेत्र- रत्नागीरी, नवी मुंबई और पालघर से मिले। फिलहाल इसे ‘वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट’ की कैटेगरी में रखा गया है, यानी इसमें ये पता लगाने कि कोशिश की जाएगी कि किस तरह से ये अपना रूप बदल रहा है। राहत की बात ये है कि फिलहाल इसे ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ में नहीं रखा गया है, यानी तुरंत चिंता की बात नहीं है।
उधर अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने एक विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि अगर भारत में कोरोना की तीसरी लहर आती है तो फिर इसके लिए डेल्टा प्लस वेरिएंट ही ज़िम्मेदार होगा। साथ ही ये भी दावा किया गया है कि इस वेरिएंट से एक्टिव केस 8 से 10 लाख तक जा सकते हैं, जिसमें से 10 प्रतिशत संख्या बच्चों की हो सकती है। कहा जा रहा है कि कोरोना का ये नया वेरिएंट इम्यून सिस्टम को भी चकमा दे सकता है।

पश्चिमी महाराष्ट्र में बढ़ रहे हैं केस
बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना के केस लगातार घट रहे हैं. लेकिन ध्यान देने की बात ये है कि कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, रत्नागिरी, सतारा और सांगली सहित पश्चिमी महाराष्ट्र के जिलों में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। यहां पॉजिटिविटी रेट भी काफी ज्यादा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के निदेशक डॉ टी पी लहाने ने कहा, ‘हमें नवी मुंबई, पालघर और रत्नागिरी में डेल्टा-प्लस मिला है। उसके बाद, हमने और सैंपल भेजे हैं। लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

रत्नागीरी में खतरा
डेल्टा प्लस के 7 में से कम से कम 5 वेरिएंट रत्नागीरी से मिले हैं। यहां 10 जून तक पॉजिटिविटी रेट 13.7 फीसदी थी। जबकि इस दौरान महाराष्ट्र में पॉजिटिविटी रेट सिर्फ 5.7% थी। यहां एक्विव मरीज़ों की संख्या 6553 है। रत्नागीरी के सिविल सर्जन संघमित्रा गवाडे के मुताबिक यहां लगातार कंटेंमेंट जोन बनाए जा रहे हैं. साथ ही गांवों को भी सील किया जा रहा है। बता दें कि डेल्ट प्सल का पहला मामला मध्य प्रदेश में मिला था।

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