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मथुरा-आगरा में एंटी पोचिंग अभियान: सपेरों के कब्जे से 49 कोबरा, 1 अजगर और 1 रैट स्नेक पकड़े

by यूनिक समय • July 26, 2023
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सावन के महीनों में वाइल्ड लाइफ और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। एंटी पोचिंग अभियान चलाकर आगरा और मथुरा के मंदिरों के बाहर से सपेरों के कब्जे से 49 कोबरा, एक अजगर और एक रैट स्नेक को मुक्त कराया है।

सावन के महीने में शिव मंदिरों के बाहर हाथ में सांप लेकर सपेरों का दिखना लोगों के लिए आम बात बन चुकी है। सपेरे सांप दिखाकर लोगों से रुपए मांगते हैं। यहीं नहीं कभी कभी डराते भी थे। इस गैरकानूनी काम की रोकथाम के लिए वाइल्ड लाइफ SOS ने यूपी वन विभाग के साथ मिलकर आगरा और मथुरा के शिव मंदिरों से 51 सांप जब्त किए। जो की सपेरों की ओर से मंदिरों के बाहर प्रदर्शित किए जा रहे थे। यह सपेरे भक्तों की आस्था का फायदा उठाने के लिए सांपों से भरी टोकरियों के साथ शहर भर में घूमते हैं।

सपेरों की ओर से सांपों को प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किया जाना पैसे कमाने का जरिया बन गया है। जहां हर साल, हजारों सांपों को जंगल से पकड़कर लाते हैं। त्योहार से पहले महीनों तक भूखा रखा जाता है। सावन के महीने के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में आते हैं, जिसका फायदा यह सपेरे सांपों की प्रदर्शनी कर उठाते हैं। जो की एक गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।

वाइल्ड लाइफ SOS और यूपी वन विभाग ने आगरा और मथुरा में एंटी पोचिंग अभियान चलाया। 9 अलग-अलग मंदिर कैलाश, बलकेश्वर, मनकामेश्वर, राजेश्वर, रावली, भूतेश्वर, रंगेश्वर, गलतेश्वर और पृथ्वीनाथ से सपेरों से 51 सांप जब्त किए गए। शहर भर में इन सपेरों से कुल 51 सांप, जिनमें 49 कोबरा, एक अजगर और एक रैट स्नेक सीज़ किए गए। सपेरों द्वारा उनकी विष ग्रंथियों को भी बेरहमी से निकाल दिया गया है l बचाए गए सांप भूखे, निर्जलीकरण और यहां तक कि जीवाणु संक्रमण जैसी कई समस्याओं से पीड़ित हैं।

आदर्श कुमार डीएफओ आगरा ने कहा, सावन का महीना है, इसलिए हमने सपेरों के चंगुल से इन सांप को बचाने के लिए मंदिरों पर यह अभियान चलाया। 5 सदस्यीय टीम भेजी। इनके साथ वाइल्ड लाइफ एस.ओ.एस टीम ने भी ऑपरेशन पूरा करने में सहयोग किया।

वाइल्ड लाइफ SOS के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी.ने कहा, सपेरों द्वारा विषैले सांप की विष ग्रंथियां को बेरहमी से निकाल दिया जाता है। कभी-कभी उनकी विष ग्रंथियां किसी नुकीली वस्तु से छेद दी जाती हैं, जिससे घाव हो जाते हैं, जो आगे जाकर संक्रमित हो जाता है। यह सांपों की मृत्यु का कारण बन जाती हैं। सभी सांप फिलहाल चिकित्सकीय निगरानी में रखे गए हैं l

वाइल्ड लाइफ SOS के सह-संस्थापक और CEO कार्तिक सत्य नारायण ने कहा, सांपों को छोटी टोकरियों में बंद करके घृणित परिस्थितियों में रखा जाता है। प्रतिबंधित होने के बावजूद, यह सपेरे लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करते है ! हम लोगों से अपील करते हैं की किसी सपेरे के पास सांप देखें तो तुरंत वन विभाग या वाइल्ड लाइफ SOS को सूचित करें जिससे इस क्रूर प्रथा को रोका जा सके।

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