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Bangladesh: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन; वेंटिलेटर पर रहते हुए भरा था आखिरी चुनावी नामांकन

by Tarun Bhardwaj • December 30, 2025
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन

Bangladesh: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन; वेंटिलेटर पर रहते हुए भरा था आखिरी चुनावी नामांकन

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यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति की दिग्गज हस्ती और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार (30 दिसंबर 2025) सुबह 6 बजे निधन हो गया। 80 वर्षीय खालिदा जिया पिछले 20 दिनों से ढाका के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर थीं। वे लंबे समय से लिवर सिरोसिस, किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं। उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दुखद खबर की पुष्टि की है।

निधन से पहले दाखिल किया था नामांकन

हैरानी की बात यह है कि जब खालिदा जिया वेंटिलेटर पर जीवन और मौत के बीच झूल रही थीं, तब भी उनकी राजनीतिक सक्रियता खत्म नहीं हुई थी। सोमवार (29 दिसंबर) दोपहर 3 बजे पार्टी नेताओं ने उनके पैतृक गढ़ बोगुरा-7 से उनका नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान, जो 2008 से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे थे, अपनी माँ की नाजुक हालत को देखते हुए 25 दिसंबर को ही बांग्लादेश लौटे हैं।

प्रधानमंत्री तक का सफर

1946 में जन्मी खालिदा जिया का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या (1981) के बाद उन्होंने राजनीति की कमान संभाली। 1991 में वे बांग्लादेश की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने 1991-1996 और 2001-2006 तक दो बार देश का नेतृत्व किया। उन्होंने जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद के सैन्य शासन को उखाड़ फेंकने के लिए सात-दलीय गठबंधन का नेतृत्व किया, जिसे बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन माना जाता है।

सत्ता संघर्ष

खालिदा जिया की पहचान आवामी लीग की नेता शेख हसीना के साथ उनके दशकों पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए भी की जाती है। इन दोनों महिलाओं के इर्द-गिर्द ही पिछले 30 सालों से बांग्लादेश की सत्ता घूमती रही। अपने आखिरी समय में वे भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी लड़ाई भी लड़ रही थीं, लेकिन उनके समर्थकों के लिए वे हमेशा ‘देशनेत्री’ बनी रहीं।

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