यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के बारूइपुर में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने बेहद सख्त और बड़ी कार्रवाई की है। बीती रात पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में इस जघन्य अपराध का एक मुख्य संदिग्ध आरोपी मारा गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। घटना को लेकर स्थानीय जनता में फैले भारी आक्रोश और तनावपूर्ण स्थिति के बीच प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रही है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं। सबूत मिटाने की जगह पर भागने की कोशिश पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पहले आनंद सरदार, प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बीती रात जांच टीम गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक को घटना से जुड़े अहम सबूतों की बरामदगी के लिए बारूइपुर के ही एक सुनसान इलाके में लेकर गई थी। पुलिस का दावा है कि उसी दौरान आरोपी ने अचानक पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश की और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस टीम ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात इलाके में बढ़ते जनाक्रोश और तनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को स्वयं जमीनी हालात का जायजा लेने बारूइपुर पहुंचे। उन्होंने बारूइपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में पीड़िता के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाते हुए त्वरित व निष्पक्ष न्याय का पक्का भरोसा दिलाया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से फोन पर भी बात की थी। इस संवेदनशील दौरे पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजी) सिद्धनाथ गुप्ता भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पुलिस के आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए जो भविष्य के लिए एक नजीर बन सके। क्यों भड़की थी हिंसा? गौरतलब है कि बारूइपुर में शनिवार को लापता हुई इस नाबालिग बच्ची का शव रविवार सुबह रेलवे लाइन के पास स्थित एक तालाब से बरामद हुआ था। शव मिलने की खबर जैसे ही फैली, स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। इस जनाक्रोश के दौरान उत्तेजित भीड़ ने एक अन्य युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और अधिक बिगड़ गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को भी संज्ञान में लिया और पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों से भी मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। [embedpress]https://www.instagram.com/reel/DahT6BeCHAu/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA[/embedpress] शुरुआत में पुलिस की भूमिका पर उठे थे सवाल इस घटना के शुरुआती दौर में स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये पर ग्रामीणों और मृतका के परिजनों ने गंभीर सवाल खड़े किए थे। परिजनों का आरोप था कि बच्ची के लापता होने की तुरंत सूचना देने के बावजूद पुलिस ने समय पर खोजबीन शुरू नहीं की और घटनास्थल पर भी काफी देरी से पहुँची। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीजी सिद्धनाथ गुप्ता ने स्वयं उस तालाब और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया था। उन्होंने स्पष्ट किया है कि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और एक मुख्य संदिग्ध के एनकाउंटर के बाद भी पुलिस की कथित लापरवाही के आरोपों की विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: HDFC Bank का करोड़ों ग्राहकों को बड़ा झटका; आज से महंगा हुआ होम लोन; बैंक ने MCLR दरों में किया बदलाव ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]