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Breaking News: राजस्थान और मध्य प्रदेश में नकली कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत, छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की किडनी फेल

by Tarun Bhardwaj • October 3, 2025
राजस्थान और मध्य प्रदेश में नकली कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत

Breaking News: राजस्थान और मध्य प्रदेश में नकली कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत, छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की किडनी फेल

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यूनिक समय, नई दिल्ली। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कथित तौर पर नकली कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। दोनों ही राज्यों राजस्थान और मध्य प्रदेश में अब तक कुल 11 बच्चों की जान जा चुकी है।

मध्य प्रदेश: छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौत

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में वायरल फीवर के बाद कफ सिरप पीने से बच्चों की हालत बिगड़ने और मौत होने की आशंका से सनसनी मची हुई है। यहां अब तक कुल 9 बच्चों की मौत हो चुकी है।

दावा किया जा रहा है कि कफ सिरप पीने से बच्चों की किडनी फेल हो गई थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

प्रशासनिक कार्रवाई

छिंदवाड़ा में हुई मौतों के मामले में बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा और जबलपुर के ड्रग और औषधि विभाग के अधिकारियों ने जबलपुर में छापा मारा है। स्वास्थ्य विभाग की 5 सदस्यीय टीम ने कटारिया फार्मा की जांच की।

जबलपुर की कटारिया फार्मासिटिकल्स ने चेन्नई की कंपनी से 660 ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप की शीशियां मंगाई थीं, जिनमें से 594 शीशियां छिंदवाड़ा के तीन स्टॉकिस्ट को भेजी गईं थीं। 16 शीशियों का सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा गया है और जबलपुर के थाना ओमती में डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

राजस्थान: भरतपुर और सीकर में 2 बच्चों की मौत

भरतपुर में 2 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जुकाम की शिकायत पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दी गई कफ सिरप पीने से बच्चे की जान गई। दवा पीने के बाद बच्चा सो गया और होश न आने पर उसे जयपुर रेफर किया गया, जहां 4 दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जांच की मांग की है।

सीकर में भी खांसी की दवा से 5 साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है।

भरतपुर के बयाना से 4 अन्य मामले सामने आए हैं। जयपुर में भी जानलेवा सिरप से डॉक्टर समेत 10 लोग प्रभावित हुए हैं। बांसवाड़ा में भी सिरप के साइड इफेक्ट्स से कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी है।

गंभीर बात यह है कि ये सिरप सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त वितरण योजना के तहत बांटे जा रहे थे, जिनकी गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।

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