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सेहत: नाखून चबाने की है आदत तो आज ही छोड़ दें, हो सकते हैं इसके कई भयानक परिणाम

by यूनिक समय • April 3, 2021
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नई दिल्ली। बचपन से हम आप सुनते आ रहे हैं कि नाखून चबाना बुरी आदत है लेकिन क्‍यों बुरी आदत है यह कभी किसी ने विस्‍तार में नहीं बताया। हां, ये तो हर किसी को पता है कि इससे बीमारियां हो सकतीं हैं लेकिन कितनी गंभीर बीमारियां और हेल्‍थ प्रॉब्‍लम हो सकती हैं आज आपको इस आर्टिकल में यहां बताया जा रहा है। दरअसल नाखून चबाना एक ऐसी आदत है जिसको समय रहते रोका नहीं गया तो यह आदत हमारी रुटीन में ऐसे शामिल हो जाती है कि पता भी नहीं चलता कि कब हमने अपने नाखूनों को कुतरना शुरू कर दिया। एक शोध के मुताबिक, दुनियाभर में 30 प्रतिशत आबादी नाखून चबाने की आदत से त्रस्‍त है। आइए जानते हैं इसके गंभीर नुकसान को।

स्किन इन्फेक्शन
हेल्‍थ के मुताबिक, नेल बाइटिंग की वजह से बैक्‍टेरियल इन्फेक्शन हो सकता है जिससे चेहरे पर रेडनेस, सूजन आदि आ सकते हैं। यही नहीं, कई बार तो नाखून के नीचे भी बैक्‍टेरियल इन्फेक्शन होने की वजह से वहां पस बन जाते हैं और असहनीय दर्द हो सकता है। ऐसे में एंटीबैक्‍टेरियल दवाओं की जरूरत पड़ती है। इतना कष्‍ट सहने से बेहतर है कि आप नाखून चबाना छोड़ दें।

गठिया या परमानेंट डिसैबिलिटी
जब हम मुंह के अंदर लगातार नाखूनों ले जाते हैं तो पैरोनीशिया जैसी कई बैक्‍टीरिया शरीर में जाकर आउट ऑफ कंट्रोल हो सकते हैं और हाथ पैर के ज्‍वाइंट्स को प्रभावित कर सकते हैं। इसे सेप्टिक अर्थराइटिस भी कहते हैं जिसका इलाज आसान नहीं है। यही नहीं, यह परमानेंट डिसैबिलिटी का कारण भी बन सकता है।

नाखूनों पर असर
अगर आपको नेल बाइटिंग की क्रानिक हैबिट है तो इसकी वजह से नाखून के अंदर के टिशू खराब हो सकते हैं जो परमानेंट डैमेज कर सकता है. कई बार इस हैबिट की वजह से नाखून बढ़ना बंद हो जाते हैं। अगर यह समस्‍या एक बार हुई तो इसे ठीक करना जैसे असंभव हो जाता है।

दांतों को पहुंचाता है नुकसान
पाया गया है कि जो लोग नेल बाइटिंग करते हैं उनके सामने की दांतों में कई तरह की समस्‍या आ जाती है। इसकी वजह से दांत टूट सकते हैं, दांतों में दरारें आ सकतीं हैं और दांतों पर जिद्दी दाग भी जम सकते हैं। इससे दांतों के ढीले होने और गिरने का खतरा भी बन जाता है। ये हैबिट मसूड़ों को भी कमजोर करते हैं।

दांत हो जाते हैं टेढ़े मेढ़े
अगर बचपन में नाखून चबाने की आदत नहीं छोड़ी जाए तो दांत टेढ़े मेढ़े भी हो सकते हैं। दरअसल यह देखा गया है कि जब हम दांतों से नाखून को चबाते हैं तो इसके लिए एक या दो ही दांतों का प्रयोग करते हैं। इन्‍हीं दांतों से लगातार चबाने से दांत की पकड़ ढ़ीली पड़ जाती है और ये अपना शेप चेंज करने लगते हैं। बचपन की इसी आदत की वजह से बाद में दांतों पर ब्रेसिज पहनने की जरूरत पड़ती है।

मसूड़ों में दर्द
कई बार नाखून के टुकड़े मुंह के अंदर रह जाते हैं और ये मसूडों में फंस जाते हैं और मसूड़ों से खून आने लगता है। इससे यहां दर्दनाक सूजन और संक्रमण और घाव भी हो सकता है।

डाइजेशन को करता है प्रभावित
नाखून चबाने की आदत से अगर मुंह में किसी तरह का बैक्‍टेरियल इंफेक्शन हुआ तो यहां से बैक्‍टेरिया पेट तक पहुंच सकते हैं और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण हो सकता है। इसकी वजह से पेट में दर्द और दस्त की समस्या हो सकती है।

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