यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे को आधुनिक, तेज़ और सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या और यातायात के भारी दबाव को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने सात प्रमुख 'हाई डेंसिटी नेटवर्क' (HDN) कॉरिडोर को फोरलेन (क्वाड्रापल) करने और कुल 8 नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से आने वाले समय में रेल यात्रियों का सफर सुगम होगा और माल ढुलाई की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। देश के ये 7 प्रमुख रेल कॉरिडोर होंगे फोरलेन केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि देश के मुख्य महानगरों और राज्यों को जोड़ने वाले सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार पटरियों (फोरलेन) के जरिए और मजबूत किया जाएगा: दिल्ली-हावड़ा रेल रूट (कानपुर, प्रयागराज, पं. दीनदयाल उपाध्याय, पटना, आसनसोल) हावड़ा-मुंबई रेल रूट दिल्ली-मुंबई रेल रूट (मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा, सूरत) दिल्ली-गुवाहाटी रेल रूट दिल्ली-चेन्नई रेल रूट (आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर, विजयवाड़ा) हावड़ा-चेन्नई रेल रूट मुंबई-चेन्नई रेल रूट (पुणे व अन्य प्रमुख क्षेत्र) 8 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स केंद्र सरकार के इस फैसले के तहत आठ प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है, जिन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है। इसके अंतर्गत पूर्वी और मध्य भारत के पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के लिए 656 किलोमीटर लंबे नेटवर्क विस्तार हेतु 10,783 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति मिली है, जिसमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड पर चौथी लाइन तथा बिलासपुर-पेंड्रा रोड मार्ग पर तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों में 540 किलोमीटर के दायरे में 10,021 करोड़ रुपये की लागत से पांच प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे, जिनके माध्यम से अरक्कोनम-रेणिगुंटा, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट, होसुर-ओमलूर, सेलम-करूर-दिंडीगुल और सिकंदराबाद-काजीपेट रेल लाइनों के दोहरीकरण एवं मल्टी-ट्रैकिंग का काम संपन्न होगा। 2,121 गांवों को सीधा फायदा सरकार के अनुसार, इस विशाल रेल नेटवर्क विस्तार से लगभग 2,121 गांवों की करीब 52 लाख आबादी को सीधा फायदा पहुंचेगा। व्यस्ततम मार्गों पर पटरियों की संख्या बढ़ने से यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी समाप्त होगी और समयबद्ध संचालन संभव हो सकेगा। माल ढुलाई क्षमता में 47 MTPA की बढ़ोतरी इन परियोजनाओं से न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। रेल क्षमता में सुधार होने से प्रति वर्ष 47 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी, जिससे कोयला, खनिज और औद्योगिक सामग्री की आवाजाही तेज़ होगी तथा कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुँच भी बेहद आसान हो जाएगी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: यूपी बोर्ड ने कक्षा 10वीं की परीक्षा प्रणाली में किया बड़ा बदलाव; विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों में खत्म हुआ आंतरिक मूल्यांकन ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]