
यूनिक समय, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। शाह ने वंदे मातरम को कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसकी चर्चा आज भी उतनी ही जरूरी है जितनी आजादी के समय थी, और 2047 में जब आधुनिक भारत होगा, तब भी रहेगी। क्योंकि वंदे मातरम में कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना है।
तुष्टीकरण का गंभीर आरोप
अमित शाह ने राज्यसभा में कांग्रेस के इतिहास और वंदे मातरम के प्रति उसके रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस के 1937 के अधिवेशन का उल्लेख किया, जब वंदे मातरम की गोल्डन जुबली मनाई जा रही थी। शाह ने आरोप लगाया कि उसी समय जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में सीमित कर दिया और इसके आखिरी चार छंदों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
शाह ने आरोप लगाया कि यहीं से तुष्टीकरण की नीति शुरू हुई। उन्होंने कहा, “मेरे जैसे कई लोग मानते हैं कि अगर तुष्टिकरण की पॉलिसी की वजह से वंदे मातरम को दो हिस्सों में नहीं बांटा गया होता, तो देश का बंटवारा नहीं होता।” उन्होंने कहा कि जब वंदे मातरम ने अपनी 100वीं सालगिरह पूरी की, तब देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी और इंदिरा गांधी ने “वंदे मातरम का नारा लगाने वाले हर किसी को जेल में डाल दिया था।”
इंडिया गठबंधन और विरोध की राजनीति
गृह मंत्री ने वर्तमान में इंडिया गठबंधन के सदस्यों पर वंदे मातरम के प्रति सम्मान न दिखाने का आरोप लगाया। शाह ने आरोप लगाया कि संसद में जब भी वंदे मातरम का गान होता है, तब इंडिया गठबंधन के कई सदस्य जानबूझकर सदन से बाहर चले जाते हैं, जबकि भाजपा के सभी नेता खड़े होकर इसका उचित सम्मान करते हैं।
उन्होंने लोकसभा में हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र बने इस गीत पर चर्चा के दौरान गांधी परिवार के दोनों सदस्य (सोनिया और राहुल गांधी) सदन से गायब थे। शाह ने कहा कि “वंदे मातरम का विरोध जवाहरलाल नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस लीडरशिप के खून में है।”
शाह के इस बयान के दौरान कांग्रेस पार्टी समेत विपक्षी पार्टियों ने सदन में कड़ी आपत्ति और नाराजगी जाहिर की। गृह मंत्री ने भगवान राम, शंकराचार्य और आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभूमि का महिमामंडन ईश्वर से भी बड़ा है और गुलामी के कालखंड में वंदे मातरम रोशनी की तरह था।
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