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Indore News: इंदौर में जल संकट का हाहाकार; बूंद-बूंद पानी को तरस रहे है लोग

by Tarun Bhardwaj • May 24, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला और लगातार आठ बार स्वच्छता का ताज अपने नाम करने वाला मध्य प्रदेश का गौरव ‘इंदौर’ इन दिनों एक बेहद गंभीर और अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। स्वच्छता में नंबर वन रहने वाला यह महानगर आज पानी की एक-एक बूंद के लिए इस कदर संघर्ष कर रहा है, मानो पानी नहीं बल्कि कोई बहुमूल्य अमृत बंट रहा हो। आठ बार स्वच्छता का रिकॉर्ड बनाने वाला यह आधुनिक शहर अब खाली बाल्टियों, सूखे ड्रमों और सूखी टंकियों के त्राहिमाम वाले शहर में तब्दील होता जा रहा है। हालात इस कदर बेकाबू और बदतर हो चुके हैं कि रिहायशी मोहल्लों में जैसे ही किसी सरकारी या निजी पानी के टैंकर की आवाज सुनाई देती है, लोगों में पानी लूटने की वैसी ही भगदड़ मच जाती है, जैसी किसी मुफ्त की दावत में मचती है।

सुबह से सज रहीं बाल्टियों की कतारें

इंदौर के विभिन्न इलाकों और कॉलोनियों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। भीषण गर्मी के इस दौर में महिलाएं सुबह तड़के से ही अपनी नींद खराब कर सड़कों और मुख्य चौराहों पर रंग-बिरंगी प्लास्टिक की बाल्टियां, लोहे के ड्रम और डिब्बे सजाकर बैठ जाती हैं। कड़ाके की धूप में लोग पानी के टैंकर के चालकों को ‘भगवान का दूसरा रूप’ मानकर घंटों टकटकी लगाए उनका इंतजार करते हैं।

पानी भरने और पाइप लगाने को लेकर आए दिन मोहल्लों में ऐसी तीखी बहस, गाली-गलौज और मारपीट हो रही है कि देखने वालों को लगता है मानो किसी विश्व युद्ध का लाइव ट्रेलर चल रहा हो। पानी की इस किल्लत से आक्रोशित होकर इंदौर की जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कई इलाकों में नाराज नागरिकों ने खाली बर्तनों के साथ सड़कों पर उतरकर चक्काजाम कर दिया है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था ठप हो रही है। जनता अब स्थानीय नेताओं को उनके चुनाव के समय किए गए बड़े-बड़े वादे याद दिला रही है, जो आज इन सूखी टंकियों के भीतर सिर्फ खोखली आवाज बनकर गूंज रहे हैं।

नलों में बह रही हवा, पानी बना ‘लिक्विड गोल्ड’

इस पूरे भयावह जल संकट पर जब नगर निगम के अधिकारियों से जवाब मांगा जाता है, तो उनका रटा-रटाया तर्क सामने आता है कि अत्यधिक गर्मी के कारण भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है, अधिकांश बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं और नर्मदा लाइन में पानी का प्रेशर कम है। लेकिन इंदौर की जागरूक जनता नगर निगम के इन दावों पर तीखे सवाल उठा रही है। लोगों का पूछना है कि जब नलों में पानी की जगह सिर्फ सूखी हवा बह रही है, तो हर महीने पानी का भारी-भरकम बिल पूरा क्यों आ रहा है? पानी न देने पर भी बिल वसूलने की यह कैसी व्यवस्था है?

इस भीषण संकट के बीच कुछ भ्रष्ट और मुनाफाखोर टैंकर माफिया भी सक्रिय हो गए हैं, जो आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर पानी को “लिक्विड गोल्ड” (तरल सोना) समझकर ऊंचे दामों और ब्लैक में बेचते हुए पकड़े गए हैं। नगर निगम की टीम हालांकि इन पर कार्रवाई का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी भी कोसों दूर है। हालात को देखकर अब इंदौर के लोग खुद ही तंज कसते हुए मजाक में कह रहे हैं कि जिस तरह इंदौर प्रशासन बड़े-बड़े आयोजन करता है, उसे देखते हुए अगली बार शहर में “जल महोत्सव” नहीं, बल्कि पानी की सिर्फ एक झलक दिखाने के लिए “जल दर्शन” कार्यक्रम का आयोजन कराना पड़ेगा।

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