यूनिक समय, नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में खिताबी जंग लड़ रही चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टीम के स्टार बाएं हाथ के तेज गेंदबाज खलील अहमद गंभीर चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। यह खबर सीएसके के प्रशंसकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि टीम पहले से ही प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों से जूझ रही है। कैसे लगी खलील को चोट? खलील अहमद को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ पिछले मैच के दौरान राइट क्वाड्रिसेप (जांघ की मांसपेशी) ग्रेड-2 इंजरी हुई। अपने स्पेल के दौरान खलील अचानक दर्द से कराहते हुए बैठ गए थे। वह अपना ओवर भी पूरा नहीं कर पाए थे। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें पूरी तरह ठीक होने में 10 से 12 हफ्ते का समय लगेगा, जिसका मतलब है कि वह अब सीधे घरेलू सीजन या अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही वापसी कर पाएंगे। धोनी की फिटनेस और कप्तानी की चुनौती सिर्फ खलील ही नहीं, बल्कि प्रशंसकों के चहेते एमएस धोनी की फिटनेस पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। धोनी सीजन की शुरुआत से ही 'काफ स्ट्रेन' (पिंडली की मांसपेशियों में खिंचाव) से जूझ रहे हैं। हालांकि धोनी ने नेट प्रैक्टिस में हल्की बल्लेबाजी शुरू की है, लेकिन वह सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ अगले मैच के लिए टीम के साथ यात्रा नहीं करेंगे। ऋतुराज गायकवाड़ के नेतृत्व में टीम को अब धोनी के अनुभव के बिना मैदान पर उतरना होगा। गेंदबाजी आक्रमण हुआ पूरी तरह ध्वस्त चेन्नई सुपर किंग्स का गेंदबाजी आक्रमण इस समय पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और उनका पेस अटैक एक 'अस्पताल' में तब्दील हो गया है, क्योंकि नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग के कारण बाहर हैं, स्पेंसर जॉनसन बैक स्ट्रेस इंजरी की वजह से टीम से जुड़ नहीं पाए और अब खलील अहमद भी चोट के चलते टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। कौन होगा खलील का रिप्लेसमेंट? खलील अहमद के बाहर होने के बाद उनके रिप्लेसमेंट को लेकर सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन ने कहा है कि कप्तान ऋतुराज और कोच स्टीफन फ्लेमिंग जल्द फैसला लेंगे, जिसमें अनुभवी मैट हेनरी, 14.20 करोड़ के महंगे ऑलराउंडर प्रशांत वीर और घरेलू प्रतिभा अंशुल कम्बोज के नाम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: India News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया अमृत काल का सबसे महत्वपूर्ण मंथन [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]