यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान के राजनीतिक गलियारों में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) को पद से हटाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अराघची पर आरोप है कि वह राष्ट्रपति के बजाय रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। राष्ट्रपति और स्पीकर बनाम विदेश मंत्री ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ का मानना है कि अराघची ने एक कैबिनेट मंत्री के बजाय IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी के सहायक के रूप में अधिक काम किया है। सूत्रों का दावा है कि पिछले दो हफ्तों से अराघची ने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन को सूचित किए बिना सीधे वाहिदी के निर्देशों पर काम किया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो वह अराघची को उनके पद से बर्खास्त कर देंगे। परमाणु वार्ता और आंतरिक दरार यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता को लेकर ईरान के भीतर मतभेद चरम पर हैं। पिछले हफ्ते संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ को शांति वार्ता से हटा दिया गया था। IRGC ने उन पर चर्चा का दायरा परमाणु मुद्दों तक बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। गालिबाफ के हटने के बाद, अराघची खुद वार्ता का नेतृत्व करने की कोशिश कर रहे थे। 'पायदारी' जैसे कट्टरपंथी गुट अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत का विरोध कर रहे हैं, जबकि उदारवादी धड़ा प्रतिबंधों से राहत पाने के लिए पश्चिम के साथ जुड़ाव चाहता है। IRGC का बढ़ता दबदबा और नया नेतृत्व इज़राइल द्वारा ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर किए जा रहे 'डिकैपिटेशन' हमलों के बीच ईरान के सरकारी तंत्र में IRGC का प्रभाव और बढ़ गया है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई, जिन्होंने अपने पिता अली खामेनेई की जगह ली है, उनके भी गार्ड कॉर्प्स के साथ गहरे संबंध माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति उन्हें अर्धसैनिक बलों का ऋणी बना सकती है। ईरान के वर्तमान सुरक्षा प्रमुख मोहम्मद बागेर ज़ोलगाद्र और उनके पूर्ववर्ती अली लारीजानी (जो पिछले महीने मारे गए), दोनों की पृष्ठभूमि IRGC कमांडर की रही है। आर्थिक संकट और अमेरिकी नाकाबंदी इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी कर दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाला कच्चा तेल निर्यात ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। वाशिंगटन ने हाल ही में ईरान के उस शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें नाकाबंदी हटाने के बदले भविष्य में परमाणु वार्ता करने की बात कही गई थी। ईरान के भीतर यह आंतरिक कलह और शीर्ष पदों पर रस्साकशी ऐसे समय में हो रही है जब देश बाहरी सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों से बुरी तरह घिरा हुआ है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: श्री राधारमण लाल जू का 484वां प्राकट्योत्सव पर वृंदावन में उमड़ा भक्ति का सैलाब; ठाकुर जी ने दिए दिव्य दर्शन [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]