यूनिक समय, नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच, लगभग सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरानी कच्चे तेल की खेप भारत की दहलीज पर पहुंची है। अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली महज 30 दिनों की 'अस्थायी छूट' का लाभ उठाते हुए दो सुपरटैंकर करीब 40 लाख (4 मिलियन) बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर पहुंच गए हैं। तटों पर पहुंचा 'काला सोना' शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, लगभग सात साल के अंतराल के बाद ईरान का 'काला सोना' भारत पहुंचा है, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'फेलिसिटी' नामक सुपरटैंकर 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर गुजरात के सिक्का तट पर लंगर डाल चुका है, जबकि इतनी ही मात्रा वाला दूसरा जहाज 'जया' ओडिशा के पारादीप तट पर खड़ा है। अमेरिका की 'मजबूरी' या कूटनीतिक पैंतरा? ईरानी तेल का भारत आना कोई सामान्य व्यापारिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी कूटनीतिक हलचल है। अमेरिका ने वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए पिछले महीने 30 दिनों की विशेष छूट दी थी। यह छूट केवल उन जहाजों के लिए थी जो पहले से ही पारगमन (transit) में थे। यह तेल ऐसे समय में पहुंचा है जब सप्ताहांत में अमेरिका-ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता विफल हो गई है। वाशिंगटन ने अब ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से नाकेबंदी (Blockade) का ऐलान कर दिया है। किसे मिलेगा यह तेल? हालांकि खरीदारों के नाम गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पारादीप में मौजूद तेल के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने खरीदारी की पुष्टि की है। गुजरात का सिक्का हब रिलायंस इंडस्ट्रीज और BPCL के लिए प्रमुख क्रूड हैंडलिंग पॉइंट है, जिससे संकेत मिलते हैं कि निजी और सरकारी दोनों कंपनियां इस सस्ते ईरानी तेल का लाभ उठा सकती हैं। भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार का इतिहास काफी पुराना रहा है, जहाँ 2018 में भारत प्रतिदिन 5.18 लाख बैरल तेल खरीदता था और कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 11.5% तक थी, लेकिन 2019 में ट्रंप प्रशासन के कड़े प्रतिबंधों के बाद मई महीने से यह आयात पूरी तरह शून्य हो गया था। आगे क्या? 19 अप्रैल है 'डेडलाइन' विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत बहुत कम समय के लिए है। अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। वर्तमान में लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल समुद्र में जहाजों पर खड़ा है। इसमें से करीब 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, बशर्ते भुगतान की अड़चनें दूर हों। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की चेतावनी के बाद अब नई खेप लोड होना लगभग असंभव हो जाएगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: UP News: नोएडा बवाल के बाद CM योगी का सख्त एक्शन; “24 घंटे में श्रमिकों से सीधे संवाद करने के दिए निर्देश” [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]