यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय भव्य रामकथा महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर देश विरोधी तत्वों और सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों को बेहद कड़े शब्दों में दो-टूक चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने रामभक्तों और विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है और जो इस देश के महान संस्कारों व गौरवशाली परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की पावन धरती कभी भी 'धर्मशाला' नहीं हो सकती। उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को इस धरती पर कभी जगह नहीं मिली है। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा वाचित दिव्य रामकथा का श्रवण भी किया और संतों की शक्ति को राष्ट्र की एकता का मूल आधार बताया। 'लव और लैंड जिहाद' के प्रति किया आगाह अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान समय में समाज के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' जैसी प्रवृत्तियों के प्रति जनता को विशेष रूप से आगाह किया। सीएम ने कहा कि इन कुत्सित प्रयासों और राष्ट्र विरोधी साजिशों के विरुद्ध पूरे समाज को पूरी एकजुटता और शक्ति के साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने देश को बांटने वाली ताकतों पर प्रहार करते हुए कहा कि कुछ नकारात्मक शक्तियां आज भी जनता को जाति, भाषा, वर्ग और क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की लगातार चेष्टा कर रही हैं। लेकिन भारत की सनातन संत शक्ति समाज को हर हाल में एकजुट कर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाना चाहती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म और राष्ट्रीय चेतना को समझाने का प्रयास किया गया है, हमें उसे केवल सुनना नहीं है, बल्कि अपने व्यावहारिक जीवन में पूरी तरह से अंगीकार और आत्मसात करना होगा। 'राम नाम में है हर समस्या का समाधान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का नाम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हर भारतीय को एक सूत्र में जोड़ने का अद्भुत सामर्थ्य रखता है। राजनीति और पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ मुट्ठी भर चुनिंदा लोगों को छोड़ दिया जाए, तो हर वो भारतवासी जिसके अंदर भारत का असली डीएनए (DNA) है, उसने भगवान राम के विराट आदर्शों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पूरे 491 वर्षों तक चला, जिसे संतों ने अपने जीवन और मरण का प्रश्न बनाया था। साल 2019 में जब सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया, तब अदालत ने भी माना कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही रामजन्मभूमि है। इस दौरान न्यायालय में पेश किए गए अकाट्य साक्ष्यों और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के प्रखर वक्तव्यों व प्रमाणों का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायमूर्ति ने स्वयं कहा था कि स्वामी जी के वक्तव्य को सुनने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से कितना बड़ा अन्याय हो रहा था। मुख्यमंत्री ने त्रेतायुग के ऐतिहासिक प्रसंगों को आज के परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि एक समय रावण और उसके राक्षसी सिंडिकेट की पूरे आर्यावर्त में घुसपैठ हो चुकी थी। खर-दूषण के आतंक से पूरा दंडकारण्य त्रस्त था, वहीं ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों ने बस्तर के वनों और समृद्ध नगरों को पूरी तरह उजाड़ दिया था। ऋषियों के आश्रमों को नष्ट करने वाले राक्षसों का उदाहरण देते हुए सीएम ने वर्तमान समाज को सचेत किया कि इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसी नकारात्मक और जनविरोधी ताकतें वर्चस्व में आएंगी, वे समाज को पूरी तरह तहस-नहस करेंगी। ये ताकतें हमारे आधुनिक शिक्षण संस्थानों, संस्कृति और शोध केंद्रों को भी उसी तरह वैचारिक रूप से बंजर व बर्बाद करने का प्रयास करेंगी, जैसा कभी खर-दूषण और ताड़का द्वारा किया जाता था। इसलिए समाज को हमेशा जागृत और संगठित रहना होगा।