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Mathura News: छाता की बंद पड़ी शुगर मिल फिर से होगी शुरू; कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का बड़ा बयान

by Tarun Bhardwaj • August 17, 2026
Chhata's closed sugar mill will restart

Mathura News: छाता की बंद पड़ी शुगर मिल फिर से होगी शुरू; कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का बड़ा बयान

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यूनिक समय, मथुरा। छाता क्षेत्र में लंबे समय से बंद पड़ी शुगर मिल को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन और ज्ञापनों के दौर के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का बड़ा बयान सामने आया है। मीडिया से रूबरू होते हुए मंत्री ने घोषणा की कि सरकार छाता शुगर मिल को नए और आधुनिक मॉडल के साथ फिर से संचालित करने जा रही है, जिससे क्षेत्र के किसानों और युवाओं को 12 महीने रोजगार मिलेगा।

छाता शुगर मिल संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन

कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्षों और वर्ष 2012 से लगातार सक्रिय ‘छाता शुगर मिल संघर्ष समिति’ के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इन पदाधिकारियों में चंद्रपाल एडवोकेट, भीमसेन शर्मा, भगवत पांडे, रामचरन मेम्बर और छाता के चेयरमैन प्रमुख रूप से शामिल थे।

12 महीने रोजगार और बहु-फसली मॉडल

कैबिनेट मंत्री ने मिल की नई रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक डुअल (डबल) प्लांट होगा, जिसमें गन्ना उत्पादक किसानों के साथ-साथ धान और मक्का उगाने वाले किसान भी अपनी फसलों की आपूर्ति कर सकेंगे। गन्ने का सीजन खत्म होने के बाद यह प्लांट धान और मक्के का उपयोग करके एथेनॉल बनाएगा, जिससे मिल 5 महीने के बजाय पूरे 12 महीने संचालित होगी। वहीं शुरुआत में इस प्लांट की पेराई क्षमता 10,000 क्विंटल प्रतिदिन होगी, जिसमें गन्ने की आवक बढ़ने पर बागपत, मुजफ्फरनगर और गजरौला की तर्ज पर क्षमता विस्तार का प्रावधान भी रखा गया है।

सितंबर में शिलान्यास की तैयारी

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भाजपा पदाधिकारियों और संघर्ष समिति के सदस्यों की मांग है कि अगली गन्ने की फसल तक यह प्लांट तैयार हो जाए। इसके लिए सितंबर माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिलान्यास और उद्घाटन कराने का समय मांगा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आगामी गन्ने के सीजन तक नया प्लांट 100% बनकर तैयार हो जाएगा।

1975 में बनी थी शुगर मिल

छाता शुगर मिल आगरा मंडल की एकमात्र मिल है। क्षेत्रीय विधायक बाबू तेजपाल सिंह के प्रयासों से 1975 में बनी यह मिल 1978 में शुरू हुई थी, जिसकी पेराई क्षमता 1250 TCD थी और इससे करीब 46,000 किसान जुड़े थे। हालांकि, 2008 में बसपा सरकार के दौरान इसे घाटे में बताकर बंद कर दिया गया था। इसके बाद छाता किसान संघर्ष समिति हाईकोर्ट से स्टे लेकर आई, और बाद में 2012 में सपा सरकार के समय भी इसे पुनः शुरू करने के केवल वादे ही किए गए थे।

आंदोलन के बाद सरकार ने लिया संज्ञान

हाल ही में छाता शुगर मिल को शुरू कराने के लिए युवा दीपक शर्मा ने 7 दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया था, जिन्हें पुलिस द्वारा उठाए जाने के बाद इलाके के लोग आक्रोशित हो गए। इसके बाद पूर्व सैनिकों के संगठन और स्थानीय किसानों ने मिलकर मोर्चा संभालते हुए धरना जारी रखा, जिसके दबाव में अब सरकार ने इस ऐतिहासिक मिल को नए स्वरूप में शुरू करने का फैसला लिया है।

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