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वृंदावन विवाद पर MLA अनिल पाराशर की सफाई: “सीओ बोले जिसको जरूरत है पास आए; यह जनप्रतिनिधि का सीधा अपमान”

by Tarun Bhardwaj • August 17, 2026
MLA Anil Parashar clarifies stance on the Vrindavan dispute

वृंदावन विवाद पर MLA अनिल पाराशर की सफाई: “सीओ बोले जिसको जरूरत है पास आए; यह जनप्रतिनिधि का सीधा अपमान”

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यूनिक समय, मथुरा। वृंदावन में हरियाली तीज पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था और पुलिस बैरियर पर गाड़ी रोके जाने को लेकर बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक विवाद सामने आया है। अलीगढ़ की कोल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अनिल पाराशर और हाथरस से मेला ड्यूटी पर आए सिकंदराराऊ के सीओ (DSP) अमित पाठक के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद विधायक अनिल पाराशर ने अपना पक्ष रखते हुए एक बयान जारी किया है और पुलिस पर तानाशाही तथा दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

क्या था पूरा विवाद?

हरियाली तीज के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मथुरा पुलिस ने वृंदावन के आंतरिक इलाकों में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था। इसी कड़ी में सौ शैय्या तिराहे व अटल्ला चुंगी से पहले पुलिस ने बैरियर लगाए थे।

शनिवार शाम जब अलीगढ़ के कोल विधायक अनिल पाराशर की गाड़ी बैरियर के पास पहुंची, तो सुरक्षाकर्मियों ने उनकी गाड़ी को रोक दिया। विधायक के स्टाफ ने ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को बताया कि गाड़ी में विधायक जी बैठे हैं, लेकिन इसके बावजूद गाड़ी को आगे नहीं जाने दिया गया। इससे नाराज होकर विधायक अनिल पाराशर खुद गाड़ी से नीचे उतरे और वहां कुर्सी पर बैठे सीओ अमित पाठक के पास पहुंच गए, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

विधायक ने जारी किया बयान

1 मिनट 13 सेकंड का वीडियो वायरल होने के बाद विधायक अनिल पाराशर ने अपना बयान जारी करते हुए पूरी घटना पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करने नहीं, बल्कि अटल्ला चुंगी स्थित बालाजी आश्रम में अपने एक रिश्तेदार का हालचाल लेने जा रहे थे। विधायक ने आरोप लगाया कि सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह खाली होने के बावजूद उन्हें आधे से पौने घंटे तक बहस के बीच रोके रखा गया।

उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने उनके स्टाफ से यह तक कह दिया कि “जिसको जरूरत है, वह खुद चलकर उनके पास आए”, जिसे विधायक ने तानाशाही और दुश्मनी भरा व्यवहार करार दिया। इसके साथ ही अनिल पाराशर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दुर्भावना से ग्रसित होकर केवल उनके बोले गए अंशों का ही वीडियो वायरल कराया, जबकि सीओ द्वारा की गई बयानबाजी को पूरी तरह छिपा लिया गया।

“मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे शिकायत”

विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि शासन के प्रोटोकॉल के तहत विधायक का स्थान चीफ सेक्रेटरी से भी ऊपर माना गया है, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आपातस्थिति में कोई जनप्रतिनिधि कहीं नहीं जा सकता, तो यह पुलिस के विवेक पर बड़ा सवाल है।

विधायक ने घोषणा की है कि वह इस पूरे मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे तथा एक जनप्रतिनिधि के अपमान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

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